सिलीगुड़ी: उत्तर बंगाल में मानसून के दस्तक देने से पहले ही डुआर्स सहित कई इलाकों में प्री-मानसून की बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। पूर्ण रूप से मानसून आने में अब महज 20 दिनों का समय बचा है। इसी के मद्देनजर उत्तर बंगाल में बाढ़ की स्थिति से निपटने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को मिनी सचिवालय 'उत्तरकन्या' (Uttarkanya) में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। उत्तर बंगाल विकास विभाग में हुई इस बैठक की अध्यक्षता विभाग के मंत्री निशीथ प्रमाणिक (Nishith Pramanik) ने की।
इस हाई-लेवल मीटिंग में उत्तर बंगाल के सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 53 विधायक और दो सांसद— जयंत राय और खगेन मुर्मू विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में बाढ़ की पूर्व तैयारियों को लेकर कई बड़े और कड़े फैसले लिए गए।
हर जिले और उत्तरकन्या में खुलेंगे विशेष कंट्रोल रूम
बैठक में तय किया गया है कि बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों की सटीक निगरानी के लिए उत्तर बंगाल के प्रत्येक जिले में आपातकालीन कंट्रोल रूम खोले जाएंगे। इसके अलावा, पूरे क्षेत्र के समन्वय (Coordination) के लिए मुख्य कंट्रोल रूम उत्तर बंगाल विकास विभाग (उत्तरकन्या) में चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा। सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन ने पहले ही सुरक्षात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में बोल्डर (पत्थर) जमा करने, राहत सामग्री, तिरपाल, आपातकालीन दवाएं और पीने के पानी का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
पहाड़ पर भूस्खलन और नदियों के जलस्तर पर विशेष नजर
गत वर्ष मिरिक में आए प्राकृतिक संकट को ध्यान में रखते हुए इस बार पहाड़ों पर भूस्खलन (Landslide) और जलस्तर में वृद्धि से निपटने के लिए गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (GTA) के साथ एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी। इसके अलावा, मालदा में गंगा के बढ़ते जलस्तर और भारत-भूटान नदी सीमा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया गया है।
सिक्किम के साथ होगी अलग बैठक, NDRF-BSF रहेंगे तैनात:
उत्तर बंगाल की लाइफलाइन मानी जाने वाली तीस्ता (Teesta) सहित कई अन्य नदियों के लिए एक दीर्घकालिक (Long-term) बाढ़ नियंत्रण योजना बनाई जा रही है। तीस्ता नदी के जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के लिए पश्चिम बंगाल सरकार जल्द ही सिक्किम सरकार के साथ एक अलग द्विपक्षीय बैठक करेगी। इसके अलावा, बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील 'हॉटस्पॉट' इलाकों में एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को तैनात किया जाएगा, जबकि आवश्यकतानुसार बीएसएफ (BSF) और एसएसबी (SSB) की भी मदद ली जाएगी।
केंद्र-राज्य के 60:40 अनुपात से दूर होगा फंड का विवाद
बाढ़ प्रबंधन के लिए फंड आवंटन को लेकर होने वाले विवादों पर भी अब विराम लग गया है। इस परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60-40 प्रतिशत के वित्तीय फॉर्मूले के तहत राशि आवंटित की जाएगी।
इस पर बात करते हुए उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने कहा, "पिछली सरकार के कार्यकाल में केंद्र और राज्य के बीच संबंध ठीक नहीं थे, जिसके कारण केंद्र सरकार चाहकर भी बंगाल में जनहित के काम नहीं कर पा रही थी। लेकिन अब वह समस्या खत्म हो चुकी है। राज्य में 'डबल इंजन सरकार' है, इसलिए प्रशासनिक और राहत कार्य बेहद तेजी से पूरे किए जाएंगे।"