देश के अधिकांश हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है और एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने के कारण आगामी तीन से चार दिनों के भीतर उत्तर भारत में व्यापक वर्षा की परिस्थितियां बनने की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार मिल रही नमी के कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे उत्तर भारत के अनेक राज्यों में तेज बारिश, गरज-चमक तथा 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव केवल तापमान में गिरावट ही नहीं लाएगा बल्कि लंबे समय से जारी उमस और लू जैसी परिस्थितियों से भी राहत दिलाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की यह सक्रियता कृषि, जल संसाधनों और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्री-मानसून गतिविधियां होंगी तेज, जल्द मिलेगी गर्मी से राहत
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में मानसून के आगमन में हल्की देरी अवश्य हुई है, लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून पूरी तरह पहुंच जाएगा। इस बीच 27 जून से 1 जुलाई तक प्री-मानसून गतिविधियों के प्रभाव से गरज-चमक, तेज हवाओं और रुक-रुककर बारिश का दौर देखने को मिलेगा। 28 जून के बाद अधिकतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आने की संभावना है, जबकि 30 जून और 1 जुलाई को अच्छी वर्षा होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह वर्षा केवल लोगों को गर्मी से राहत ही नहीं देगी बल्कि वायु गुणवत्ता में भी सुधार ला सकती है तथा शहरी क्षेत्रों में धूल प्रदूषण को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भारी वर्षा से बदलेगा मौसम का स्वरूप
उत्तर प्रदेश में फिलहाल मौसम सामान्य बना रह सकता है, लेकिन 29 जून से 1 जुलाई के बीच व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। लखनऊ, मेरठ, नोएडा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और बरेली सहित अनेक जिलों में भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज आंधी चलने की संभावना जताई गई है। वहीं मध्य प्रदेश में इस बार मानसून अत्यधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और सागर सहित अधिकांश क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का पूर्वानुमान है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई को गति मिलेगी और जलाशयों में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। दूसरी ओर राजस्थान के जयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर और उदयपुर सहित कई जिलों में भी अच्छी वर्षा और तेज हवाओं का अनुमान है, जिससे भीषण गर्मी से राहत मिलने के साथ-साथ पेयजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को भी लाभ पहुंच सकता है।
पंजाब, हरियाणा और मैदानी क्षेत्रों में समाप्त होगी लू की मार
पंजाब और हरियाणा में पिछले कई सप्ताह से पड़ रही भीषण गर्मी और लू के कारण जनजीवन प्रभावित रहा है, लेकिन अब मौसम में परिवर्तन के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। प्री-मानसून गतिविधियों के प्रभाव से दोनों राज्यों में हल्की से मध्यम वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून पूरे क्षेत्र को अपने प्रभाव में ले लेगा। इससे कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी, धान की रोपाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी तथा भूजल स्तर में भी सुधार आने की संभावना है। तापमान में गिरावट के कारण बिजली की मांग में भी कमी आ सकती है और लोगों को लंबे समय बाद मौसम का सुखद अनुभव होगा।
पर्वतीय राज्यों में बढ़ा भूस्खलन और अतिवृष्टि का खतरा, यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में मानसून राहत के साथ-साथ चुनौती भी लेकर आ सकता है। उत्तराखंड के पौड़ी, नैनीताल, अल्मोड़ा और देहरादून सहित अनेक जिलों में तेज हवाओं और भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली, कुल्लू और कांगड़ा क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा तथा कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन ने पर्वतीय ढलानों पर भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए सतर्कता बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचना, नदी-नालों से दूरी बनाए रखना तथा स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना अत्यंत आवश्यक होगा।
बदलते मौसम के बीच सावधानी भी उतनी ही जरूरी
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले कुछ दिन राहत और जोखिम दोनों लेकर आ सकते हैं। जहां एक ओर वर्षा से तापमान में गिरावट आएगी और किसानों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी, वहीं तेज आंधी, बिजली गिरने और जलभराव जैसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। किसानों को भी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने का सुझाव दिया गया है। यदि वर्तमान मौसम तंत्र सक्रिय बना रहता है तो जुलाई के पहले सप्ताह तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह स्थापित हो जाएगा और भीषण गर्मी का दौर समाप्त होने की संभावना है।