नई दिल्ली।कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हुई हैं और चुनाव आयोग ने मतदाताओं के वोट की सुरक्षा की जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।
राहुल गांधी ने कहा कि उनके आरोप बिना आधार के नहीं हैं और उन्होंने पहले भी चुनावी प्रक्रिया में कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार से पद से इस्तीफा देने की मांग भी की।
'एंटी-इन्कंबेंसी सभी के खिलाफ आई, लेकिन मोदी के साथ नहीं'
राहुल गांधी ने भारत की राजनीति में एंटी-इन्कंबेंसी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सरकारों के खिलाफ समय के साथ एंटी-इन्कंबेंसी बनती है और इसके उदाहरण उन्होंने इंदिरा गांधी समेत कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के संदर्भ में दिए।उनका सवाल था कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत भाजपा नेताओं के खिलाफ कई जगह एंटी-इन्कंबेंसी क्यों दिखाई नहीं देती।
'वोट चोरी से कानून चोरी, फिर संस्था चोरी'
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि अगर लोगों का वोट कमजोर होता है तो उसका असर संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ता है। उन्होंने इसे 'वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी' की कड़ी के रूप में बताया।
उन्होंने दावा किया कि यदि किसी सांसद का निर्वाचन कथित रूप से चोरी किए गए वोट के कारण हुआ है और वही सांसद कानून बनाता है, तो उन कानूनों और संस्थागत बदलावों की वैधता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी लोगों के वोट की रक्षा करना है और कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि आने वाले समय में उनके दावों से जुड़े और तथ्यों को सामने रखा जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की जांच किए जाने की बात भी कही।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
CEC ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले चुनाव आयोग ने एक दिन पहले उन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया दी थी, जिनमें दो चुनाव आयुक्तों द्वारा SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां जताने की बात कही गई थी। आयोग ने कहा था कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग राय सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।