आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में INS महेंद्रगिरि के शामिल होने के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने युद्ध के स्वरूप में बड़ा बदलाव जरूर किया है, लेकिन इससे पारंपरिक सैन्य क्षमताओं का महत्व कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अहम भूमिका निभा सकता है, फिर भी युद्ध में अंतिम सफलता प्रशिक्षित सैनिकों, मजबूत सैन्य तैयारी और राष्ट्र के अटूट संकल्प से ही मिलेगी। उनके अनुसार तकनीक और मानवीय क्षमता का संतुलित मेल ही भारत की रक्षा नीति का आधार है।
नई तकनीक और पारंपरिक हथियार एक-दूसरे के पूरक
रक्षा मंत्री ने कहा कि नई तकनीक और पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म को प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि एक-दूसरे का पूरक समझा जाना चाहिए। यदि आधुनिक तकनीक के बिना पारंपरिक हथियार अधूरे हैं, तो केवल तकनीक के भरोसे पारंपरिक सैन्य शक्ति की अनदेखी करना भी गंभीर भूल होगी। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जिन देशों ने नई तकनीकों के आकर्षण में अपनी मूल सैन्य क्षमता को कमजोर होने दिया, उन्हें अंततः भारी कीमत चुकानी पड़ी। इसलिए भारत दोनों क्षेत्रों में समान रूप से निवेश और विकास की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
INS महेंद्रगिरि आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमता का प्रतीक
राजनाथ सिंह ने INS महेंद्रगिरि को केवल एक युद्धपोत नहीं बल्कि भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देश में निर्मित प्रत्येक नया युद्धपोत भारतीय रक्षा उद्योग, तकनीकी कौशल और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती देता है। इससे न केवल नौसेना की क्षमता बढ़ती है बल्कि रक्षा उत्पादन से जुड़े हजारों उद्योगों, इंजीनियरों और कुशल मानव संसाधन को भी प्रोत्साहन मिलता है।
'ऑपरेशन सिंदूर' का किया उल्लेख, दिखाई आधुनिक और पारंपरिक ताकत की ताकत
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने हालिया सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने पहले ही यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य शक्ति का संयुक्त उपयोग कितना प्रभावी हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने इस अभियान के दौरान देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ यह संदेश भी दिया कि भारत आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करने और किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।
हर नया युद्धपोत बनेगा भारत के समुद्री भविष्य में निवेश
रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्धपोत निर्माण केवल एक जहाज तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे औद्योगिक और रक्षा इकोसिस्टम के विकास से जुड़ा हुआ है। प्रत्येक नया युद्धपोत देश के समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों में निवेश करते हुए अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी लगातार सशक्त बनाए रखेगा, जिससे देश की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति दोनों और मजबूत होंगी।