ऑकलैंड - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ीलैंड के ऑकलैंड में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों और पहलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र भी हैं। दोनों देशों ने संस्कृति, शिक्षा, खेल, सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है।
सांस्कृतिक सहयोग से बढ़ेगा लोगों के बीच जुड़ाव
पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए सांस्कृतिक सहयोग समझौता (MoU) से कला, संस्कृति, विरासत और रचनात्मक उद्योगों के क्षेत्र में आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा तथा सांस्कृतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
भारतीय छात्रों के लिए बड़ा अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूज़ीलैंड लंबे समय से भारतीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र रहा है। उन्होंने न्यूज़ीलैंड की प्रमुख विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने का आमंत्रण दिया। उनका मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग और अधिक मजबूत होगा तथा विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का लाभ मिलेगा।
खेलों में 100 साल पुराने रिश्ते होंगे और मजबूत
पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 2026 भारत और न्यूज़ीलैंड के खेल संबंधों की 100वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। उन्होंने याद दिलाया कि 100 वर्ष पहले मेजर ध्यानचंद के नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम ने न्यूज़ीलैंड दौरा कर इतिहास रचा था। इसी अवसर पर दोनों देशों में कई खेल आयोजनों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के साथ-साथ हॉकी और अन्य खेलों में भी सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त खेल कार्य योजना (Joint Sports Action Plan) तैयार की गई है।
आतंकवाद और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर साझा रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ मिलकर प्रभावी कार्रवाई के लिए भारत और न्यूज़ीलैंड ने एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) का गठन किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी वैश्विक संस्थाओं के माध्यम से ही संभव है।