नई दिल्ली. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की जिसमें द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा हुई। रुबियो पांच महीने से भी कम समय में दूसरी बार भारत आए और उनके साथ बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी था। बैठक देश के वित्तीय केंद्र में हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। क्षेत्रीय विकास पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रुबियो ने ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
ऊर्जा व्यापार बढ़ाने पर अमेरिकी जोर
रुबियो ने भारत से अमेरिकी ऊर्जा की खरीद बढ़ाने का स्पष्ट आग्रह किया। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता के बयान के अनुसार रुबियो ने दोहराया कि अमेरिका के साथ बढ़ता ऊर्जा व्यापार भारत की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और उसकी विशाल उपभोक्ता मांग को पूरा करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां विश्व बाजार में आने वाले वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल के परिशोधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों को लाभ होगा। रुबियो ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अमेरिका को विश्वसनीय स्रोत के रूप में पेश किया। इस दिशा में प्रगति दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
रक्षा और तकनीक खरीद की अपील
रुबियो ने भारत से अमेरिकी तकनीकों और सैन्य तथा परमाणु उपकरणों की खरीद बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की। रुबियो के अनुसार अमेरिकी प्रणालियों की बढ़ी हुई खरीद दोनों देशों की सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ा सकती है। उन्होंने जोर दिया कि ये तकनीकें और प्रणालियां भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेंगी। अमेरिकी पक्ष रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी चाहता है। बैठक में इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। भारतीय अधिकारियों की ओर से रुबियो की इन टिप्पणियों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई।
द्विपक्षीय संबंधों में मौजूदा तनाव के बीच बैठक
यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनावों के बीच हुई। ट्रंप प्रशासन की अप्रत्याशित व्यापार नीतियों, भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करने वाले बढ़े हुए आप्रवासन प्रतिबंधों और अमेरिका की पाकिस्तान सैन्य नेतृत्व के साथ बढ़ती निकटता जैसे मुद्दे पृष्ठभूमि में रहे। इन चुनौतियों के बावजूद दोनों पक्ष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमत दिखे। रुबियो के भारत दौरे का उद्देश्य व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देना था। बैठक में इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा होने से संबंधों में विश्वास बढ़ाने का अवसर मिला। दोनों देश व्यापक सहयोग के महत्व को समझते हैं।
सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के बयान
मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की जिसमें व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और जन-जन के संबंध शामिल हैं। उन्होंने क्षेत्रीय विकास पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। रुबियो ने अलग पोस्ट में कहा कि उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर चर्चा की तथा अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के महत्व की पुष्टि की। दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि बैठक सकारात्मक रही। सोशल मीडिया पर इन संदेशों ने द्विपक्षीय सहयोग की निरंतरता को रेखांकित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुलाकात को महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है।
वेनेजुएला तेल और भारतीय कंपनियों की संभावित भूमिका
रुबियो ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारतीय कंपनियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल के परिशोधन में भूमिका निभा सकती हैं क्योंकि यह तेल विश्व बाजार में अधिक मात्रा में आ रहा है। भारत की रिफाइनरी क्षमता को देखते हुए यह सहयोग दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो सकता है। अमेरिकी पक्ष ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी बढ़ाना चाहता है। इस प्रस्ताव से ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर खुल सकते हैं। दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बना रहे हैं। रुबियो के इस सुझाव ने व्यावहारिक सहयोग की संभावनाओं को उजागर किया। आगे की वार्ताओं में इस दिशा में प्रगति देखने को मिल सकती है।