रूस ने इबोला वायरस के नए स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला संक्रमण तेजी से फैल रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे लेकर गंभीर चिंता जताई है।
रूस ने नए वैक्सीन पर किया दावा
रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को के अनुसार, रूसी वैज्ञानिकों ने ऐसी वैक्सीन तैयार की है जो इबोला वायरस के नए स्ट्रेन के साथ-साथ दुर्लभ ‘Bundibugyo’ स्ट्रेन से भी सुरक्षा देने में सक्षम हो सकती है।
हालांकि इस वैक्सीन की प्रभावशीलता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
DRC में तेजी से फैल रहा संक्रमण
WHO के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 220 संदिग्ध मौतों की भी जानकारी मिली है। इनमें से 101 मामलों और 10 मौतों की पुष्टि हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित
इबोला के बढ़ते खतरे को देखते हुए 17 मई को इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक संक्रमण अब पड़ोसी देश युगांडा तक भी पहुंच चुका है।
क्या है Bundibugyo स्ट्रेन?
Bundibugyo इबोला वायरस का एक दुर्लभ स्ट्रेन माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अन्य स्ट्रेन्स की तुलना में कम घातक हो सकता है, लेकिन इसके तेजी से फैलने की आशंका बनी रहती है और यह गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है।
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
इबोला वायरस संक्रमित जानवरों से इंसानों में फैलता है और बाद में संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से दूसरे लोगों तक पहुंचता है।
हालांकि यह वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित मरीज की देखभाल के दौरान सावधानी न बरतने पर संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इबोला के प्रमुख लक्षण
इबोला संक्रमण के दौरान मरीज में तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस वायरस की औसत मृत्यु दर करीब 50 प्रतिशत तक मानी जाती है।