दिल्ली, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने कथित डीपफेक वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इन वीडियो में उनके नाम से जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं और उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा। थरूर ने इसे ‘फेक न्यूज़’ की गंभीर समस्या बताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
एआई तकनीक का दुरुपयोग और बढ़ती चुनौती
थरूर ने इस बात पर चिंता जताई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का उपयोग अब गलत तरीके से किया जा रहा है। पुराने इंटरव्यू के वास्तविक वीडियो पर एआई आधारित आवाज जोड़कर ऐसे क्लिप तैयार किए जा रहे हैं, जो बेहद विश्वसनीय प्रतीत होते हैं। इस प्रकार के डीपफेक वीडियो आम लोगों को भ्रमित कर रहे हैं और सच्चाई को पहचानना कठिन बना रहे हैं।
फर्जी दावों का खंडन
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो ऐसे भी सामने आए, जिनमें यह दावा किया गया कि थरूर ने सरकार की आलोचना करते हुए पाकिस्तान की विदेश नीति का समर्थन किया है। हालांकि, ऐसी किसी भी बात की पुष्टि नहीं हुई है और थरूर ने स्वयं इन दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके नाम से फैलाई जा रही ये बातें पूरी तरह निराधार हैं।
‘रूल ऑफ थंब’ की दी सलाह
थरूर ने इस संदर्भ में एक सरल ‘रूल ऑफ थंब’ भी बताया। उन्होंने कहा कि यदि कोई बयान उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल या किसी प्रमाणित मंच पर प्रकाशित नहीं है, तो उसे फर्जी मानना चाहिए। यह सलाह आम लोगों के लिए डिजिटल युग में सही जानकारी पहचानने का एक महत्वपूर्ण तरीका बन सकती है।
सोशल मीडिया पर जागरूकता की आवश्यकता
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही सूचनाओं को बिना जांचे-परखे स्वीकार करना खतरनाक हो सकता है। डीपफेक जैसी तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बीच लोगों को अधिक सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है, ताकि वे फर्जी खबरों के जाल में न फंसें।
भविष्य के लिए चेतावनी और जिम्मेदारी
थरूर की यह प्रतिक्रिया केवल व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। एआई और डिजिटल तकनीक के इस दौर में सत्य और असत्य के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, ऐसे में जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार ही इसका समाधान हो सकता है।