नई दिल्ली - चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के हमले के बीच रविवार को खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बयान जारी किया है। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सरकार हालात पर बारीकी से नजर रख रही है। मंत्रालय ने कहा कि उसने आम लोगों को चीनी उपलब्ध कराने और कीमतें स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया था कि चीनी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। खड़गे ने चीनी के कम स्टॉक, बढ़ती कीमतों, आयात और एथनॉल नीति को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए थे।

केंद्र सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है कि पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। केंद्र सरकार ने कहा है कि 20 जुलाई, 2026 को कीमत 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त, 2026 को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा, “चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हाल ही में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना गलत है।”
मंत्रालय ने बताई वजह
मंत्रालय ने कहा है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हुई है, जिनमें उम्मीद से कम उत्पादन, त्योहारों के मौसम से पहले मांग का बढ़ना, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को हुआ नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की सप्लाई में कमी और कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी किया जाना शामिल हैं।
चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद
मंत्रालय ने कहा है कि अनुमान से कम उत्पादन होने के बावजूद अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि दुनिया भर में भी चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और चीनी की सप्लाई में कमी होना एक वैश्विक घटना है और यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।
40 प्रतिशत महंगी हो गई चीनी- खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि तीन महीने में चीनी करीब 40 प्रतिशत महंगी हो गई है और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए कि त्योहारों से पहले जनता पर पड़ने वाली इस महंगाई की मार के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने कहा था कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी होने से महंगाई का बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है।
कांग्रेस ने कहा है कि करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना एथनॉल उत्पादन में चला गया, जिसकी वजह से पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलोग्राम और गुड़ की कीमत 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।