सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और आपात स्थितियों के दौरान प्राइवेट एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर मुद्दा है, तभी 32 याचिकाओं पर विचार किया जा रहा है। अदालत ने केंद्र सरकार और Directorate General of Civil Aviation (DGCA) को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के समक्ष केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि मामला आम जनता के हित से जुड़ा है और सिविल एविएशन मंत्रालय इसे उच्च स्तर पर देख रहा है। अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है।
PIL में मनमानी किराया वसूली पर नियंत्रण की मांग
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि त्योहारों और इमरजेंसी हालात में एयरलाइंस डायनामिक प्राइसिंग और अतिरिक्त शुल्क के जरिए यात्रियों से मनमाना किराया वसूलती हैं। याचिका में हवाई किराए पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट नियम बनाने और एक स्वतंत्र व मजबूत रेगुलेटर नियुक्त करने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कई एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दी है। इसके अलावा सीट चयन, भोजन और अन्य सेवाओं के नाम पर छिपे शुल्क वसूले जा रहे हैं। वर्तमान में किसी भी सरकारी संस्था के पास किराए की सीमा तय करने का सीधा अधिकार नहीं है, जिससे एयरलाइंस को मनमानी बढ़ोतरी का अवसर मिल जाता है।
पहले भी कोर्ट ने मांगा था जवाब
17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, DGCA और Airports Economic Regulatory Authority (AERA) को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा था। कोर्ट ने त्योहारों के समय किराए में भारी उछाल को शोषण जैसा बताया था। याचिका में महाकुंभ और पहलगाम आतंकी हमले के बाद किराया वृद्धि का भी हवाला दिया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, सामान्यतः 4-5 हजार रुपए में मिलने वाली टिकटें 30 हजार रुपए से अधिक में बिक रही थीं। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी केंद्र से सवाल किया था कि संकट की स्थिति में अन्य एयरलाइंस को फायदा उठाने की अनुमति कैसे दी गई।
सरकार ने एयरलाइंस से मांगा डेटा
DGCA ने विमानन कंपनियों से दिसंबर महीने में वसूले गए औसत किराए का पूरा विवरण मांगा है। यह कदम तब उठाया गया, जब पायलटों की कमी के चलते हजारों उड़ानें रद्द हुईं और यात्रियों को कई गुना अधिक किराया चुकाना पड़ा।
क्या है बड़ा सवाल?
क्या त्योहारों में हवाई किराए पर कैप लगेगा?
क्या स्वतंत्र एविएशन रेगुलेटर बनेगा?
क्या डायनामिक प्राइसिंग पर पारदर्शिता अनिवार्य होगी?
अब सबकी नजरें 23 मार्च की सुनवाई पर है, जहां कोर्ट की अगली टिप्पणी इस बहस की दिशा तय कर सकती है।
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