UPI पर नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, भारत में UPI और डिजिटल पेमेंट से जुड़े नीतिगत फैसले घरेलू जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं।सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि नए MDR फ्रेमवर्क को वापस लेने का फिलहाल कोई सवाल नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले पर पुनर्विचार की योजना नहीं है।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR
नए फ्रेमवर्क के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR को ग्राहक से सीधे वसूलने वाला UPI चार्ज नहीं बताया गया है। यह मर्चेंट-साइड शुल्क है और सरकार ने बैंकों तथा पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों को इसे ग्राहकों पर डालने से रोकने की व्यवस्था स्पष्ट की है।
₹2,000 तक का UPI पेमेंट रहेगा फ्री
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा। इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन राशि की परवाह किए बिना फ्री रहेंगे।सरकार का दावा है कि करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे। छोटे व्यापारियों के लिए भी कुछ जीरो-MDR श्रेणियां जारी रहेंगी।
राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?
इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UPI से जुड़े नए नियमों पर सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू करने का रास्ता अमेरिकी दबाव के कारण खोला गया है।राहुल गांधी ने यह भी तर्क दिया कि भले ही शुल्क सीधे व्यापारियों से लिया जाए, लेकिन इसका असर आगे चलकर ग्राहकों पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, इस फैसले से सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
UPI के नए MDR नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। याचिका में नए नियम को रद्द करने की मांग की गई है।इस तरह फिलहाल UPI MDR को लेकर सरकार की नीति, विपक्ष के आरोप और कानूनी चुनौती तीनों मोर्चों पर मामला चर्चा में है। नए नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने हैं।