नेपाल के बैतडी जिले से बजांग जा रही एक बरात की बस रात के समय अनियंत्रित होकर 150 मीटर गहरी खाई में गिर गई, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। बस पुरचूंणी नगरपालिका–7 के भवने गांव से दुल्हन लेकर सुनकुडा की ओर जा रही थी कि अचानक बड़गांव मोड़ पर चालक का नियंत्रण छूट गया और बस गहरे खड्ड में समा गई। विवाह का उत्सव पलभर में एक भयावह दृश्य में बदल गया और खुशियों की जगह चीख–पुकार और अंधेरा छा गया।
13 लोगों की दर्दनाक मौत, 34 घायल, कई की हालत गंभीर
दुर्घटना के बाद मौके पर मौजूद दृश्य बेहद हृदयविदारक था। बस में सवार 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 34 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में कई की हालत चिंताजनक बनी हुई है और उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। हादसे में घायल लोगों के लिए हर क्षण भारी पीड़ा और संघर्ष लेकर आया, जबकि मृतकों के परिवारों पर अकल्पनीय दुख का पहाड़ टूट पड़ा।
रात भर चला बचाव अभियान, स्थानीय लोग बने संकटमोचक
घटना की सूचना मिलते ही नेपाल एपीएफ, स्थानीय प्रहरी और गांववालों ने रात के अंधेरे में ही रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। खाई की गहराई और कठिन भू-भाग के बावजूद बचावकर्मियों ने बड़ी हिम्मत के साथ लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। प्रहरी निरीक्षक बलदेव बडू के अनुसार, अंधेरा, ठंड और लैंडस्केप की चुनौती के बावजूद बचाव अभियान पूरी रात चलता रहा और कई घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका।
सीमा क्षेत्र में परिवहन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस भीषण हादसे ने एक बार फिर नेपाल–भारत सीमा क्षेत्र में परिवहन सुरक्षा और सड़कों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़गांव मोड़ जैसे कई खतरनाक स्थान लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए बदनाम रहे हैं, जहाँ न तो पर्याप्त चेतावनी संकेत हैं और न ही सुरक्षा अवरोध। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता अब और स्पष्ट हो गई है।
शोक में डूबे परिजन, पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल
एक बारात की खुशियों से भरी बस, पल भर में शोक का प्रतीक बन गई। जिन परिवारों में विवाह की तैयारी थी, वहाँ अब अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है। सीमावर्ती गांवों में मातम का माहौल है और हर कोई इस दर्दनाक घटना से व्यथित है। मृतकों के परिवारों को सांत्वना देने के लिए प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधि पहुंच रहे हैं, लेकिन इस आपदा का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
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