बैरकपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से 'सस्पेंशन और वापसी' का खेल चर्चा में है। उत्तर 24 परगना के उत्तर बैरकपुर नगर पालिका के वार्ड नंबर 23 के पार्षद रवींद्रनाथ भट्टाचार्य, जिन्हें एक बुजुर्ग की मौत के मामले में पार्टी से निलंबित किया गया था, उनकी ससम्मान वापसी की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
क्या था पूरा मामला?
घटना 8 फरवरी 2026 की है। बैरकपुर के मणिरामपुर इलाके में एक अवैध निर्माण को लेकर विवाद शुरू हुआ था। 89 वर्षीय वृद्ध तुलसी अधिकारी और उनके परिवार ने इस निर्माण का विरोध किया था। आरोप है कि पार्षद रवींद्रनाथ भट्टाचार्य ने विरोध करने पर बुजुर्ग के बेटे हेमंत की पिटाई की। जब पिता तुलसी अधिकारी अपने बेटे को बचाने आए, तो पार्षद ने उन्हें जोर से लात मार दी। इस हमले के बाद बुजुर्ग बेहोश होकर गिर पड़े और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
सस्पेंशन और गिरफ्तारी का नाटक?
घटना के बाद जब जनाक्रोश बढ़ा और विपक्ष ने हमला बोला, तो पुलिस ने आरोपी पार्षद को गिरफ्तार कर लिया। उस समय बैरकपुर के सांसद पार्थ भौमिक ने घटना की कड़ी निंदा की थी और पार्षद को ६ साल के लिए पार्टी से निलंबित (सस्पेंड) करने की घोषणा की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि प्रशासन और कानून अपना काम करेंगे।
वोट खत्म होते ही बदली तस्वीर
अब ताजा जानकारी के अनुसार, जैसे ही चुनाव की प्रक्रिया संपन्न हुई,तृणमूल कांग्रेस ने अपने कड़े रुख को नरम करते हुए आरोपी पार्षद रवींद्रनाथ भट्टाचार्य को वापस पार्टी में शामिल कर लिया है। वह अब दोबारा सक्रिय रूप से अपने पद पर काम कर रहे हैं। इस कदम के बाद स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने ममता सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि निलंबन केवल दिखावा था और पुलिस शुरू से ही आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही थी।