दरअसल जब राहुल कंस्वा से पूछा गया कि आपका परिवार चार दशक से कांग्रेस के खिलाफ लड़ता रहा। एक बार टिकट कटते ही विरोधी पार्टी के साथ आ गए, अचानक ऐसे क्या हालात बन गए ? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि परिस्थितियां एक व्यक्ति विशेष और कुछ लोगों द्वारा बनाई गई। अच्छा काम कर रहे थे, जनता ने कभी कोई शिकायत नहीं की। जनता का बार बार आशीर्वाद मिलता रहा। उन व्यक्ति विशेष का कोई पर्सनल ईगो है, जो 15 साल से कभी मेरे पिता तो कभी मेरे पीछे लगे रहे कि टिकट नहीं मिलना चाहिए। उन्हें पॉलिटिकल कंपीटीशन नजर आ रहा था या उनके जीवन में क्या मजबूरियां थीं, यह सवाल तो आपको उनसे पूछना चाहिए। इन परिस्थितियों को देखते हुए मुझे फैसला करना पड़ा। मैं चूरू लोकसभा क्षेत्र की जनता की आवाज सुनकर कांग्रेस में आया। मेरे लोगों ने मुझसे कहा कि आप एक व्यक्ति से हार मान लेंगे तो बाकी का क्या होगा? मैंने अपनी जनता की आवाज सुनी और कांग्रेस में आया।
डोटासरा के टॉर्चर वाले बयान पर राहुल ने कही ये बात
दरअसल जिस दिन राहुल कस्वां की ज्वॉइनिंग हुई थी उस दिन प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने कहा कि किसान का बेटा होने के कारण टॉर्चर किया गया। जब उनसे इस बारें में पूछा गया कि सच में आप टॉर्चर हो रहे थे तो आवाज क्यों नहीं उठाई? इस पर राहुल कस्वां ने कहा कि टॉर्चर तो क्या घुटन हो रही थी। कोई सुन ही नहीं रहा था। 15 साल बहुत हो जाते हैं, एक दिन की बात नहीं है। पिताजी का करियर आगे बढ़ रहा था तो आपने कहा कि टिकट काट दीजिए। उस वक्त पार्टी में मजबूत लोग बैठे हुए थे तो उन्होंने मुझे एक मौका दिया। जब हम आगे बढ़ रहे थे, चूरू में अच्छा काम कर रहे थे। चूरू में हाईवे, नई ट्रेन लेकर आए। यह सब देखकर उन्हें चुभन हुई होगी कि यह इतने काम क्यों हो रहे हैं, क्योंकि उनसे तो कुछ हुआ नहीं। इतने लंबे राजनीतिक करियर में नेचर पार्क को छोड़कर कोई एक बड़ा काम गिना दें, उसमें भी स्टेट की पॉलिसी थी तो आ गया। एक पुल बनवाया, वह भी टूट गया, उसे डिस्मेंटल करना पड़ेगा। ऐसे लोगों को उभरते हुए किसान कौम के युवा पसंद नहीं आते तो जो विकास के काम करवाते हों। वही उनकी चिढ़ थी कि वे 15 साल से हमारे पीछे पड़े हुए थे।बिना नाम लिए राजेंद्र राठौड़ पर साधा निशाना
राहुल कंस्वा ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष का नाम लिए बिना कहा कि हजार बार उन्होंने मेरे बारे में उल्टे शब्द कहे हैं। मैं तो इस हालात में आ गया हूं कि मुझे बोलना पड़ रहा है। पहले मैं कभी बोला ही नहीं। न मैंने कभी यह कहा कि इनकी टिकट काट दीजिए, मुझे यहां से चुनाव लड़ना है। मैं तो किसी कंपीटीशन में था ही नहीं, मेरा कंपीटीशन तो खुद से ही था कि मुझे डेवलपमेंट में चूरू को नंबर वन बनाना है।बीजेपी में टिकट कटने की बताई ये वजह
बीजेपी से लोकसभा की टिकट कटने के सवाल पर राहुल कस्वां ने कहा कि जयपुर से गंगानगर हाईवे पर चलेंगे तो 500 किलोमीटर में केवल एक एमएलए है बीजेपी का। किसने टिकट बांटी, पैनल कौन बना रहा था? किसके घर पर दावेदारों की लाइन लगी थी? टिकट आप बांट रहे थे। खुद की सीट आप चेंज कर रहे हो। किसी ने कहा नहीं, खुद ने वीटो पावर लगाई कि सीट चेंज करूंगा। जिलाध्यक्ष, महामंत्री से लेकर जिले की पूरी टीम आप बना रहे हो। आपने सांसद के नाते मुझसे कभी इस मामले में चर्चा तक नहीं की। जिस दिन फॉर्म भरने जा रहे थे, उस दिन सुबह 8:30 बजे फोन आया कि मैं नामांकन करने जा रहा हूं, आप भी आना। मैंने उनसे कहा था कि इतला दे रहे हो या बुला रहे हो, कोई जवाब नहीं था। मैं मेरा भादरा का प्रोग्राम बीच में छोड़कर पहुंचा। चुनाव में एक दिन भी नहीं कहा कि प्रचार करना है, टूर का प्रोग्राम है। मैं प्रचार के लिए सरदारशहर गया, नोहर, राजगढ़, भादरा गया।राजेंद्र राठौड़ की हार की बताई वजह
राजेंद्र राठौड़ की विधानसभा चुनाव में हार को लेकर राहुल कस्वां ने कहा कि जनता सब समझती है। आपको अपने ऊपर बहुत घमंड था कि सब कुछ मैनेज कर लिया जाएगा, किसी व्यक्ति की जरूरत ही नहीं है। उस वक्त पूरे चुनाव को जातिगत बनाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। पूरे चूरू लोकसभा में ऐसा माहौल बना दिया कि जातियों के आधार पर चुनाव खड़ा कर दिया। रिजल्ट निगेटिव आ गया तो इल्जाम दूसरों पर डालने का प्रयास कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि वे अपने चुनाव में खुद के वजन से ही दब गए। परसेप्शन यह बनाने का प्रयास किया कि मैं ही मुख्यमंत्री हूं। मैं ही सब कुछ करने जाऊंगा। लोगों ने उस परसेप्शन को दरकिनार किया है। लोगों ने उनके खिलाफ वोटिंग की है। यह उन्हें स्वीकार करना चाहिए। दूसरों पर इल्जाम डालने से कुछ नहीं होता।आरोपों पर क्या बोले राहुल कंस्वा
जब उनसे पूछा गया कि आरोप है कि मेहनत से अपना मुकाम बनाने वाले किसान के बेटे खिलाड़ी को आप बर्दाश्त नहीं कर पाए और पार्टी छोड़ दी? तो उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं, यह सही है। मैंने कहां उनका विरोध किया? मेरा मकसद यह नहीं है कि रिप्सलमेंट किससे किया, टिकट कोई इश्यू ही नहीं है, यह बड़ा मुद्दा नहीं है। हमारे परिवार ने 47 साल से चुनाव लड़े हैं। छह चुनाव तो निर्दलीय लड़े हैं। पहले पार्टी ने कहा कि एक परिवार से दो टिकट नहीं देंगे तो हमने चूं तक नहीं और सीट छोड़ दी। शेखावत साहब ने मेरे पिताजी से 1999-2000 में कहा था कि एमपी साहब! यह इलेक्शन आपको नहीं लड़ना है, सतीश पूनिया लड़े थे। हमने अपनी सीट छोड़ दी थी। यह मुद्दा ही नहीं था।कैसे हुए कांग्रेस में शामिल?
राहुल कस्वां ने कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने ही बात की। शेखावाटी बेल्ट में हम नए नहीं है, सब लोग जानते हैं। मेरे लोग हैं, सबकी बात सुनकर फैसला किया। मुझे शीर्ष नेतृत्व ने बुलाया और मान सम्मान दिया।जब राहुल कस्वां से पूछा गया कि आपका परिवार लंबे समय से बीजेपी में है, आपके कांग्रेस जॉइन करने से पहले बीजेपी में किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की? इस पर उन्होंने कहा कि मैंने अध्यक्ष महोदय से बात करने की कोशिश की। ट्वीट के मार्फत भी यह बात पूछी थी कि मेरा गुनाह क्या है? वो जवाब कभी मिला नहीं। यही कहते रहे कि आपसे कोई बात करेगा। मैंने काफी इंतजार किया, फिर मैंने यह फैसला लिया। मैंने देखा कि चुनावों के दौरान ही कोई बात नहीं कर रहा तो इसके बाद फिर कौन पूछेगा? मेरे से बड़ा मेरे लोगों का फैसला है। लोगों के मन में दर्द था। उनकी आंखें नम थीं कि हमारा गुनाह क्या था वो तो बता देते। कांग्रेस पार्टी ने मुझे मान सम्मान दिया, इज्जत दी है। जनता की आवाज के रूप में मुझे स्वीकारा है। आज हम मैदान में हैं और फैसला स्वाभिमान की लड़ाई का होगा।