Jaipur: राजस्थान में पहली बार पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री (Rajasthan News) के लिए एक अलग सलाहकार टीम बनाई जा रही है। भाजपा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को विभिन्न राजनीतिक-प्रशासनिक मुद्दों पर सलाह देने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टीम एक थिंक टैंक की तरह काम करेगी। इस टीम में पार्टी ने राजेन्द्र राठौड़, पूर्व कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राव राजेन्द्र सिंह को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। इन तीनों के साथ एक आईपीएस, एक आईएएस और आर्थिक जगत के तीन विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है, यानी इस टीम में कुल 8 लोग होंगे।
मंगलवार-बुधवार को दिल्ली में होगी मीटिंग
इस टीम की मंगलवार और बुधवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी. एल. संतोष के साथ मीटिंग भी होनी है। राजस्थान में अब तक किसी भी सरकार में सत्तासीन पार्टी के स्तर पर इस तरह की कोई टीम कभी नहीं बनाई गई है। मुख्यमंत्रियों ने जरूर निजी स्तर पर अपने सलाहकार रखे हैं, लेकिन सत्तासीन पार्टी के स्तर पर ऐसी किसी भी टीम का गठन पहली बार हो रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे राजस्थान में दिल्ली के बढ़ते दखल के रूप में देखते हैं, लेकिन भाजपा का कहना है कि उनका मकसद एक ऐसी सरकार स्थापित करना है, जिससे स्पष्ट रूप से यह महसूस हो कि यह मुद्दों पर चलने वाली सरकार है, जैसे गुजरात, असम, हरियाणा, उत्तरप्रदेश या मध्यप्रदेश में दिखाई देता है।
राजेन्द्र राठौड़ को ही क्यों चुना?
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राजेन्द्र राठौड़ (Rajasthan News) न केवल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, बल्कि वे प्रदेश भाजपा में सबसे सीनियर विधायक और 15 से अधिक छोटे-बड़े विभागों के तीन बार मंत्री भी रहे। वे लगातार 7 चुनाव जीत चुके थे। मुख्यमंत्री पद पर भैंरोंसिंह शेखावत रहे हों या वसुंधरा राजे, दोनों के कार्यकाल में मजबूत भूमिका में रहे। वे सड़क पर प्रदर्शन करने से लेकर सदन के भीतर भाजपा की सरकार और संगठन दोनों के लिए एक मजबूत रणनीतिकार रहे हैं।
दिग्गज ने दिया सुझाव
सितंबर-2022 में कांग्रेस सरकार के 92 विधायकों के इस्तीफे मामले को भी राठौड़ ही न्यायालय में लेकर गए थे। उन्होंने इस मामले में पैरवी भी स्वयं ही की थी, जिसके बाद सरकार और विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष सीपी जोशी को विधायकों के इस्तीफों के मामले में स्थिति स्पष्ट करनी ही पड़ी। राठौड़ दिसंबर-2023 में चुनाव हार गए। तभी से पार्टी लगातार राठौड़ की भूमिका को लेकर विचार कर रही थी। सूत्रों का कहना है कि राजस्थान से जुड़े और देश की राजनीतिक व्यवस्था में शीर्ष 5 पदों पर काबिज एक दिग्गज ने ही इस टीम के गठन का यह सुझाव दिया है।
लोकसभा चुनावों में जीत है मुख्य लक्ष्य
राजस्थान में दो बार से लोकसभा चुनावों (2014 और 2019) में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। दोनों बार एक भी सीट कांग्रेस को नहीं जीतने दी। इस बार भी पार्टी सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज करना चाहती है। इसी बीच करणपुर विधानसभा के उप चुनावों में भाजपा को प्रदेश में सरकार बनने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। वहां पर प्रत्याशी सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी को चुनावों के दौरान ही मंत्री बना देने के बावजूद पार्टी को हार मिली। इसे पार्टी ने चेतावनी के रूप में लिया है।
भाजपा सरकार देना चाहती है लोगों को संदेश
पार्टी चाहती है कि लोकसभा चुनावों से पहले सरकार (Rajasthan News) कुछ ऐसे फैसले करे, जिससे प्रदेश में लोगों को यह संदेश जाए कि भाजपा की सरकार कांग्रेस सरकार से अलग और बेहतर है। ऐसे में यह टीम लोकसभा चुनावों से पहले ही चार-पांच महत्वपूर्ण विषयों में कोई मिसाल पेश करने लायक सुझाव देने पर काम करेगी।
टीम कैसे करेगी काम
यह टीम कोई मौखिक या कागजी सुझाव देने का काम नहीं करेगी। किसी भी मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना तैयार करके ही सुझाव देगी। टीम को पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि उसे क्या और कैसे सुझाव देने हैं। सुझावों को सीएम भजनलाल शर्मा को देने के साथ एक कॉपी केन्द्रीय नेतृत्व को भी भेजी जाएगी। पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने भास्कर को बताया कि हमने अनौपचारिक रूप से कुछ सुझावों पर काम किया है। अभी टीम का विस्तृत और विधिवत गठन होना शेष है। उसके बाद ही टीम का अधिकृत स्वरूप सामने आएगा।
1. संकल्प पत्र को लागू करवाने पर रहेगा फोकस
यह टीम भाजपा के संकल्प पत्र (चुनाव घोषणा पत्र) को लागू करवाने पर खास फोकस करेगी। पार्टी का मानना है कि जनता ने भाजपा को इस घोषणा पत्र के आधार पर वोट दिया है। ऐसे में राजस्थान में जल्द से जल्द इसे लागू किया जाना ही है। इस संकल्प पत्र में 2 लाख 50 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी देने, 450 रुपए में सिलेंडर देने और किसानों को प्रति वर्ष 12,000 रुपए की आर्थिक सहायता देने जैसे मुद्दे हैं।
2. अचानक सामने आने वाले मुद्दे
राजस्थान में इन दिनों आरएएस मुख्य परीक्षा की तारीख आगे बढ़वाने की मांग को लेकर हजारों युवा अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, भरतपुर और धौलपुर में जाटों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की मांग एक बार फिर उठ रही है। यह दोनों मुद्दे अचानक सामने आए हैं। आरएएस परीक्षा के संबंध में रविवार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्य सचिव सुधांश पंत से सलाह मांगी है, हालांकि इस पर अभी तक फैसला कुछ भी नहीं हुआ है।
3. राजनीतिक व प्रशासनिक मुद्दे
राजनीतिक व प्रशासनिक आधार पर सामने आने वाले मुद्दे, जिनमें भाजपा के विभिन्न अभियानों को चलाने, बोर्ड-निगम में नियुक्तियां, प्रशासनिक तबादले, पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं पर निर्णय, नई योजनाओं को बनाने, बजट तैयार करने जैसे बहुत से राजनीतिक-प्रशासनिक महत्व के विषयों पर यह टीम अपनी सलाह देगी।
4. रोजगार, निवेश, शिक्षा, पर्यटन, कृषि पर खास ध्यान
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में खान, नगरीय विकास, पर्यटन और कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यह थिंक टैंक इन विषयों पर देश के नामी लोगों से सलाह-मशविरा करके अपनी विशेष रिपोर्ट भी तैयार करेगा, ताकि प्रदेश की आर्थिक-वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके।
5. कानून व्यवस्था व सुरक्षा
भाजपा ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के दौरान रेप जैसे जघन्य अपराधों में प्रदेश के पूरे देश में नंबर वन बनने सहित महिला सुरक्षा को मुद्दा बनाया था। ऐसे में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भी यह टीम सुझाव देगी।
भाजपा की इस टीम के पीछे क्या सोच है?
भाजपा का स्पष्ट रूप से मानना है कि राजस्थान के पड़ोसी प्रदेशों हरियाणा, उत्तरप्रदेश, गुजरात और मध्यप्रदेश में भाजपा ने हर बार सरकार रिपीट की है। गुजरात में तो करीब 30 वर्ष होने को है। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा सभी में पार्टी ने राजस्थान की तुलना में कई गुणा बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में भाजपा राजस्थान में 2023 से 2028 के बीच कुछ ऐसा शासन देना चाहती है, जो कांग्रेस व भाजपा के बीच बड़ा अंतर पैदा कर सके और यहां भी सरकार रिपीट हो।
पार्टी की सामूहिक सोच से होंगे फैसले
पार्टी ने पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाने सहित झाबर सिंह खर्रा, अविनाश गहलोत, संजय शर्मा, गौतम दक, मंजू बाघमार, बाबूलाल खराड़ी, दीया कुमारी, कन्हैया लाल चौधरी, विजय सिंह चौधरी, प्रेम चंद बैरवा जैसे लोगों को पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें से कोई भी पहले मंत्री नहीं रहा है। ऐसे में सोच ये है कि सरकार विभिन्न मुद्दों पर सामूहिक निर्णय ले और भाजपा की सोच के अनुसार शासन दे। पार्टी के अनुसार किसी विधायक को मंत्री बनाने का अर्थ यह नहीं हो कि वो उस विभाग का मालिक है। पार्टी में जिस तरह से संगठन में कोई कार्यभार होता है, ठीक वैसा ही कार्यभार मंत्री पद के लिए होगा। पार्टी की सामूहिक सोच से फैसले होंगे, न कि व्यक्ति की सोच से।
वसुंधरा राजे ने भी बनाई थी सलाहकार परिषद
वसुंधरा राजे ने वर्ष 2013-2018 के बीच मुख्यमंत्री रहने के दौरान कॉर्पोरेट जगत के नामचीन लोगों की एक सलाहकार परिषद बनाई थी। मार्च-2014 में राजे ने नैना लाल किदवई, मोहन पाई, उदय कोटक, किरण मजूमदार शॉ, सुरेश नेवतिया और बिबेक देबरॉय को राजस्थान बुलाया था और राजस्थान के औद्योगिक-आर्थिक विकास के लिए सुझाव देने को कहा था। इन सभी को राजे ने राज्य आयोजना आयोग से जोड़ा था।
गहलोत ने भी 6 विधायकों को बनाया था सलाहकार
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सरकार (Rajasthan News) के दौरान (2018-2023) नवंबर-2021 में मंत्रिमंडल का पुनर्गठन किया था। चूंकि सरकार कांग्रेस के अलावा निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही थी, ऐसे में बहुत से वरिष्ठ विधायक भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से नाराज हो सकते थे। उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए गहलोत ने तब राजकुमार शर्मा, बाबूलाल नागर, डॉ. जितेन्द्र सिंह, संयम लोढ़ा, दानिश अबरार और रामकेश मीणा को अपना सलाहकार बनाया था। वर्ष 2023 में हुए चुनावों में यह सभी चुनाव हार गए। इनके अलावा गहलोत ने रिटायर्ड आईएएस अफसरों में से डीबी गुप्ता, निरंजन आर्य, अरविंद मायाराम और डॉ. गोविंद शर्मा को भी अपना सलाहकार नियुक्त किया था। गहलोत ने वर्ष 2008 से 2013 के बीच पूर्व पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह को भी अपना राजनीतिक सलाहकार (पॉलिटिकल एडवाइजर) बनाया था।