Jaipur: कांग्रेस सरकार पर 2020 में आए राजनीतिक संकट (Rajasthan Politics) को लेकर कार्यवाहक सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी रहे लोकेश शर्मा ने बड़ा खुलासा किया है। लोकेश ने कहा कि राज्य सरकार ने सचिन पायलट, उनके समर्थकों व अन्य विधायकों पर निगरानी के लिए तमाम कदम उठाए। कौन कहां जा रहा है। फोन भी सर्विलांस पर लिए जाते हैं। इसी का नतीजा रहा कि तीन विधायकों को मानेसर जाने से रोककर वापस जयपुर लाया जा सका। लोकेश ने विधायकों के नाम तो नहीं लिए, लेकिन उस समय विधायक रोहित बोहरा, दानिश अबरार और चेतन डूडी को वापस लाने की चर्चा रही थी। लोकेश ने उन पर लगे फोन टैपिंग के आरोपों को लेकर कहा कि उन्होंने फोन टैपिंग नहीं कराई थी। उन्हें जो ऑडियो क्लिप मिली थी, उनको सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया था। जिससे पता लगे कि सरकार कौन गिराना चाहता है। ऑडियो क्लिप वायरल होने की वजह से ही अगले दिन महेश जोशी एफआईआर दर्ज करा सके।
आलाकमान की इच्छा पूरी होती तो आज अलग होते परिणाम...
लोकेश ने 25 सितंबर 2022 की घटना को लेकर कहा कि आलाकमान ने जिस उद्देश्य से मल्लिर्काजुन खरगे और अजय माकन को भेजा था। वह पूरी हो जाती तो आज राजस्थान के विधानसभा चुनावों की स्थिति कुछ अलग ही होती। उन्होंने 25 सितंबर 2022 की घटना को प्रायोजित बताते हुए कहा कि विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री निवास पर होने के बजाय शांति धारीवाल के घर पैरेरल हुई। सभी कैसे बसों में बैठकर सी.पी. जोशी के पास गए। इस्तीफे तक दे दिए।
सरकार बचाने वाले विधायकों को ऑबलाइज करना पड़ा भारी
लोकेश ने कहा कि सरकार बचाने में साथ रहे विधायक और मंत्रियों को टिकट देकर ऑबलाइज करना भारी पड़ा। ये पांच साल सत्ता सुख भोग चुके थे। फिर भी उन्हें टिकट देकर ऑबलाइज किया गया, जबकि रिपोर्ट इनके पक्ष में नहीं थी। इस चुनाव में गुटबाजी का भी नुकसान हुआ। जिस कंपनी को चुनाव का काम सौंपा गया, उसने भी मनमानी की। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा व प्रभारी तक की अनदेखी की। राजस्थान एकमात्र ऐसा प्रदेश था, जहां सरकार बना सकते थे। लेकिन, सीएम की ओर से समय रहते फैसले नहीं लेने से सत्ता से बाहर हो गए।
मजबूरी में सोशल मीडिया पर साझा की पीड़ा
लोकेश ने मुख्यमंत्री के इस्तीफा देने के बाद ही (Rajasthan Politics) अपनी पीड़ा सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर कहा कि वे मुख्यमंत्री से कहना चाहते थे। लेकिन वे कॉकस में घिरे रहे और उनकी बातों को नहीं सुना। इसी वजह से सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर अपनी पीड़ा को जाहिर करना पड़ा। यह पीड़ा चुनाव परिणाम के बाद इसलिए जाहिर की, क्योंकि पहले करते तो पूरा दोष उनके ऊपर सरकार के हारने का आता। जब मुख्यमंत्री का इस्तीफा हुआ तो पीड़ा जाहिर कर दी। यह पीड़ा तमाम उन परिस्थितियों का चित्रण और वर्णन है, जिनकी वजह से हम राजस्थान में सरकार की वापसी नहीं करवा पाए। उनका कहना था कि यदि आलाकमान भी इस बारे में कुछ जानकारी चाहेगा तो बताने को तैयार हैं।
क्या बोले लोकेश शर्मा?
लोकेश ने कहा कि दो साल से गहलोत कॉकस में घिरना (Rajasthan Politics) शुरू हो गए थे, लेकिन छह माह से यह ज्यादा हावी हो गया था। लोकेश ने उन अधिकारियों के नाम तो नहीं बताए, लेकिन तीन आईएएस अधिकारी व सीएम के साथ 24 घंटे रहने वाले बाहरी राजनीतिक व्यक्ति के कॉकस का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूरा प्रदेश उन्हें जानता है कि कौन इर्द-गिर्द रहता है। उनका प्रयास रहा कि हम ही उन्हें सुलाकर जाएं और हम ही आकर उठाएं, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति सीएम से मिल नहीं पाए। इन लोगों की वजह से किसी की बात वे सुनने तक को तैयार नहीं थे। यह लोग उन्हीं से मिलाते थे जो उनके मनपसंद की बातें करें। इससे गेप बनता गया।