Jaipur: विधानसभा चुनावों में हार के बाद अब कांग्रेस संगठन (Rajasthan Congress) में फेजवार कुछ बदलाव होंगे। पहले फेज में नेता प्रतिपक्ष के पद पर नियुक्ति की जाएगी। इस सप्ताह नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा होने के आसार हैं। कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर नेता प्रतिपक्ष के नाम पर चर्चा हो चुकी है। अब नियुक्ति के आदेश जारी करना बाकी है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति हो चुकी है, ऐसे में अब राजस्थान में भी जल्द नियुक्ति के आसार हैं। कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के पद पर पार्टी के कोर वोट बैंक से जुड़े वर्ग से ही बनाया जाएगा। अब तक जितने भी नेता प्रतिपक्ष गए हैं उनमें पार्टी ने यही फॉर्मूला अपनाया है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसे की जाएगी नियुक्ति
लोकसभा चुनावों में केवल पांच महीने का समय बचा है, इसलिए जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर ही इस पद पर नियुक्ति की जाएगी। जाट और आदिवासी चेहरों में से नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की चर्चा है।
नेता प्रतिपक्ष के लिए 5 नेता दावेदार
नेता प्रतिपक्ष के लिए कांग्रेस में पांच से छह नेताओं के नाम चर्चा में है। सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा, हरीश चौधरी,राजेंद्र पारीक, महेंद्रजीत मालवीय में से किसी नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाना है। पिछली बार जब कांग्रेस विपक्ष में थी तो सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था और रामेश्वर डूडी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी।
नेता प्रतिपक्ष के पद पर गहलोत-पायलट फैक्टर भी चलेगा
नेता प्रतिपक्ष के पद पर नियुक्ति में अशोक गहलोत (Rajasthan Congress) और सचिन पायलट फैक्टर हावी रहने के आसार है। हाईकमान ने इन दोनों नेताओं की राय भी ली है। गहलोत खेमे के नेता भी दावेदार हैं। आदिवासी चेहरे के तौर पर महेंद्र जीत मालवीय का नाम सुझाया गया है जबकि ब्राह्मण चेहरे के तौर पर राजेंद्र पारीक का नाम है। दोनों ही गहलोत समर्थक हैं। बीजेपी में भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी का एक वर्ग ब्राह्मण को प्रमुख पद देने की पैरवी कर रहा है ताकि सियासी बैलेंस बनाया जा सके। सचिन पायलट को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर प्रदेशाध्यक्ष के पद पर बदलाव टाला जा सकता है। प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष में जाट-ब्राह्मण कॉम्बिनेशन चलता रहा है
पहले चलता था जाट-ब्राह्मण कॉम्बिनेशन
विपक्ष में रहने के दौरान दो प्रमुख पदों पर जाट और ब्राह्मण का कॉम्बिनेशन चलता रहा है। पिछली बार पायलट के प्रदेशाध्यक्ष बनने से पहले यह कॉम्बिनेशन अपनाया जाता रहा है। 2003 से 2008 के दौरान कई बार नेता प्रतिपक्ष और प्रदेशाध्यक्ष बदले गए थे। उस वक्त ब्राह्मण को नेता प्रतिपक्ष बनाया तो प्रदेशाध्यक्ष जाट वर्ग के नेता को दिया, जाट को प्रदेशाध्यक्ष बनाने पर ब्राह्मण को नेता प्रतिपक्ष बनाया। 2013 में पायलट के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद यह फॉर्मूला बदल गया।
सियासी समीकरण साधने उप नेता प्रतिपक्ष भी बनाएगी कांग्रेस
सियासी समीकरण साधने के लिए कांग्रेस में उप नेता प्रतिपक्ष बनाने पर भी विचार चल रहा है। पिछली बार विपक्ष में रहते हुए रमेश मीणा को उपनेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। इस बार भी अगर नेता प्रतिपक्ष या प्रदेशाध्यक्ष में आदिवासी चेहरे को मौका नहीं मिलता है तो उसे उपनेता प्रतिपक्ष बनाया जा सकता है। उपनेता प्रतिपक्ष का संविधान में प्रावधान नहीं है, जिस तरह उपमुख्यमंत्री के पद का संवैधानिक प्रावधान नहीं है, उसी तरह उपनेता प्रतिपक्ष का भी नहीं है। राजनीतिक दल सियासी समीकरण साधने अपने स्तर पर उपनेता प्रतिपक्ष बनाते रहे हैं।
क्यों अहम है नेता प्रतिपक्ष का पद?
नेता प्रतिपक्ष का पद काफी प्रतिष्ठित माना जाता है। नेता प्रतिपक्ष (Rajasthan Congress) को कैबिनेट मंत्री जैसी सुविधाएं मिलती हैं। सरकारी बंगला, सरकारी गाड़ी, प्राइवेट सेक्रेटरी के लिए एक आरएएस अफसर और दूसरा स्टाफ मिलता है। कैबिनेट मंत्री जैसी सिक्योरिटी मिलती है। मुख्य सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्त, लोकायुक्त सहित कई संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों के लिए बनी कमेटी में नेता प्रतिपक्ष मेंबर होता है।