Jaipur: भारतीय सीए संस्थान (ICAI) की जयपुर ब्रांच की ओर से आयोजित दो दिवसीय (Jaya Kishori) नेशनल कॉन्फ्रेंस 'वेदा' में आज मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी पहुंची। इस दौरान मेंटल हेल्थ पर बात करते हुए जया किशोरी ने कहा अपने आसपास लोग अपने जैसे रखिए। उन्होंने कहा- लोग कहते हैं कर्ण और दुर्योधन की दोस्ती बहुत अच्छी थी। वहीं सबसे अच्छी दोस्ती कृष्ण और अर्जुन की हुई है। आज का यूथ थोड़ा अलग चल रहा है। राम को अच्छा नहीं मानकर रावण को अच्छा मान रहा है। इसलिए वो कृष्ण और अर्जुन की दोस्ती की जगह कर्ण और दुर्योधन की दोस्ती को महत्व दे रहा है। ये कहकर कर्ण जानते थे दुर्योधन गलत थे, तब भी साथ नहीं छोड़ा। क्या कर लिया। दोनों मर गए। साथ देकर बचा लेता तो मैं मानती दोस्ती अच्छी थी। इससे अच्छे को कृष्ण और अर्जुन है।
सक्सेसफुल होने का बताया मंत्र
सेशन शुरू करते हुए जया किशोरी ने कहा- मैं ये नहीं बताने आई की मार्क्स कैसे लाएं। मेरे ही कभी नहीं आए। मैने जैसे-तैसे एग्जाम पास किए हैं। मैं ये बताने आई हूं कि सक्सेसफुल कैसे होते हैं। क्योंकि फील्ड कोई भी हो। सक्सेस का मंत्र एक ही होता है। जब इस सेशन के लिए सब कुछ फाइनल हो चुका था। मैंने टीम से पूछा टॉपिक क्या होगा। उन्होंने मुझे चार टॉपिक दिए थे। उन्होंने कहा चारों पर बोलने हैं। इसलिए मैं थोड़ा-थोड़ा कर चारों पर बात करूंगी। इस दौरान उन्होंने बच्चों का उदाहरण देकर टाइम मैनेजमेंट के बारे में भी बताया। दरअसल, बिरला ऑडिटोरियम में चल रहे इस कॉन्फ्रेंस का आज समापन होगा। कार्यक्रम में देशभर के लगभग 2700 सीए सदस्य भाग ले रहे हैं।
पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ कैसे करे बैलेंस
जया किशोरी ने कहा- ये पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ (Jaya Kishori) में बैलेंस करना उन लोगों के लिए काफी मुश्किल होता है। जो परिवार और काम दोनों से प्यार करते हैं। ये बैलेंस कैसे बने। ये दुनिया बैलेंस पर टिकी है। जब बैलेंस बिगड़ता है, तब ही भगवान नीचे आते हैं। तब तक भगवान कहते हैं। तुम ही संभालो। यानी बैलेंस लाइफ का नहीं बिगड़ना चाहिए। मेहनत और मनोरंजन में बैलेंस होना चाहिए। मेहनत ऐसी नहीं करनी चाहिए कि लाइफ में मनोरंजन बचे ही न और मनोरंजन भी ऐसे नहीं करना चाहिए की लाइफ में मेहनत न हो।
कैसे करे टाइम मैनेजमेंट?
जया किशोरी ने कहा- इसके लिए सबसे पहला पॉइंट टाइम मैनेजमेंट है। भगवान ने सभी को 24 घंटे ही दिए हैं। दुनियाभर के काम आपको 24 घंटे में ही करने हैं। बचपन में ये दिक्कत नहीं थी। बच्चों स्कूल, ट्यूशन भी जा रहा है। खेल भी रहा है। माता-पिता के साथ भी है। उसे कभी समय की दिक्कत नहीं हुआ। ऐसा क्यों। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका टाइम टेबल बना होता था। इसलिए दिक्कत नहीं हुआ। आज का बच्चा हमसे ज्यादा काम करता है। पैरेंट्स उसे सभी इतनी क्लासेज में डाल रहे हैं। समझ नहीं आ रहा बनाना क्या चाहते हैं। वो डांस, म्यूजिक, फुटबॉल, बैडमिंट और करांटे भी सीख रहा है। हमसे ज्यादा काम तो वो बच्चा कर रहा है। उसने सब मैनेज किया है। हम बचपन की चीजें छोड़ देते हैं। इसलिए बचपना खत्म हो जाता है।
अपनों को वक्त दें-जया किशोरी
जया किशोरी ने कहा- हम जो मशीन होने की बात करते हैं। सेट होकर काम करना है उससे थोड़ा अलग हटकर बात करती हूं। काम वापस आ जाएगा। पैसे वापस आ जाएंगे। पहचान भी बनाई जा सकती है। अपने वापस नहीं आ सकते। ये चले गए तो वापस नहीं आएंगे। आपने माता-पिता और परिवार को टाइम दीजिए। लोग परिवार को आखिर में रखते हो। हम अपनी एक धुन में चल रहे हैं। इतनी उम्र तो है। मैं कहती हूं जिंदगी पर भरोसा कोई मनुष्य से सीखे, अगले पल का भरोसा नहीं है। रीचार्ज तीस दिन का करता है। उसको लगता है तीस दिन तो निकल ही जाएंगे। हम परिवार का समय ये कहकर रोक रखे हैं कि तुम्हारे लिए ही तो कर रहे हैं। रिटायर्मेंट के बाद पूरा समय तुम्हारा। रिटायरमेंट के बाद रहेंगे क्या ये पक्का है। ये सीख हमें कोविड ने दी है। जिंदा निकल गए काफी है। उस वक्त समझ आया जान की कीमत क्या है। पहले तो 60-70 सोच रहे थे। इसिलए सेट यॉर प्रायोरिटी प्रेजेंट में। परिवार को समय सबसे ज्यादा चाहिए।
'सिर्फ माता-पिता चाहते हैं, आप उनसे अच्छा करें'
विदेश में एक बड़े स्टार हैं। जिन्होंने अपनी प्रोपर्टी चैरटी के नाम कर दी। उनसे मीडिया ने पूछा बच्चे के लिए कुछ नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा- अच्छा होगा तो मुझसे भी ज्यादा कमा लेगा। नालायक होगा तो मेरा भी उड़ा देगा। मेरा काम उसको लायक बनाना है। कमाना उसका काम है। अपनी जिंदगी को चलाएगा कैसे, ये उसका काम है। वो बैलेंस आपको बनाना होगा। ये तभी कर सकते हैं, जब उसके साथ समय बिता रहे हैं। एक माता-पिता ही हैं जो चाहते हैं बच्चा मेरे से भी ज्यादा सक्सेसफुल हो। हर रिश्ता दुनिया का ये चाहता है कि आप अच्छा करें। उनसे ज्यादा अच्छ न करें। सिर्फ माता-पिता चाहते हैं। आप उनसे अच्छा करें।
खुद को समय देकर चार्ज करें
उन्होंने कहा- आप मशीन नहीं है। मशीन को भी अपना समय चहिए। उसे भी कुछ देर के लिए बंद करना पड़ता है। चार्ज करना पड़ता है। फोन भी 24 घंटे नहीं चलता। आप खुद को चार्ज कब करते हैं, जब बीमार पड़ जाते हैं। उस समय चार्ज नहीं होते। वो तो बीमार है। वो रेस्ट नहीं होता। इसलिए जिंदगी में छोटे ब्रेक लेने पड़ेंगे। तब आप दिमाग और विचार से भी खुले होंगे। कई बार हमें लगता है कम इतनी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मन नहीं लगता। क्योंकि वो शरीर का बताने का तरीका है। अब और नहीं हो रहा।
समय-समय पर ब्रेक लें
जया किशोरी ने कहा- आपने बहुत लोगों को देखा होगा पैर हिलाते हैं। ये आदतें होती हैं। ये शरीर के बताने का तरीका होता है। मुझे ये आदतें कभी नहीं थीं। मुझे लगता था काम तो बहुत करती हूं। लेकिन स्ट्रेस नहीं हो रहा। इस बीच मुझे पैर हिलाने की आदत होने लगी। मुझे लगा उम्र बढ़ रही है। उस हिसाब से मेटाबोलिज्म धीरे होने लगता है। इसलिए कहते हैं अपना ध्यान रखो। इसका मतलब है कि एक समय बाद शरीर कहता है थोड़ा ब्रेक। मैं मशीन नहीं हूं। मुझे रिकवर होने में समय लगता है। तब मुझे समझ आया इन लक्षणों का ध्यान मुझे रखना होगा। ये मेरा शरीर बता रहा है कि आराम की जरूरत है। इसलिए नोटिस करिए। परेशान या एंग्जाइटी हो रही है तो ब्रेक लो। हम इंतेजार करते हैं कि कोई बड़ी बीमारी हिट करेगी। उन्होंने कहा- तीन गुण हैं- सात्विक, तामसिक, राजसिक। जो आपको चलाती हैं। ये तीनों सभी के अंदर होते हैं। आपको समझना है की किसको किस लेवल पर रखना है।
जया किशोरी ने कहा- लोग सोचते हैं कि पैसा सब कुछ है। पैसा होगा तो सब हो जाएगा। सही है कि पैसा बहुत जरूरी है। सबसे ज्यादा नहीं। पैसा तब कमा पाओगे जब शरीर में जान होगी। बचपन में पिता से सुना था कि जिनके पास व्यायाम का समय नहीं होता। उन्हें बीमारी के लिए समय निकालने पड़ता है। आज आप बोलेंगे मेरे पास टाइम नहीं है। फिर शरीर बोलेगा अब मैं टाइम देता हूं। तुम मुझे आराम का टाइम नहीं दे रहे। मैं तुम्हें बीमारी का टाइम देता हूं। तब एक-दो महीने बैठना। तब आप कुछ नहीं कर पाते। फिर कोई बेड रेस्ट पर है, कोई बाहर नहीं घूम सकता। आखिर बैठना पड़ा नहा। जो अपने स्वास्थ के लिए समय नहीं निकालते हैं। उन्हें बीमारी के लिए समय निकालना पड़ता है। थोड़ी दूर जाना है तो मशीन की तरह काम करीए। बहुत दूर जाना है तो इंसान की तरह काम करीए।