Jaipur: राजस्थान में डिप्टी सीएम पद पर दीया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा (Rajasthan Deputy CM) की शपथ को शनिवार को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि डिप्टी सीएम पद का संविधान में प्रावधान नहीं इसलिए यह नियुक्ति रद्द की जाए। याचिका एडवोकेट ओमप्रकाश सोलंकी ने दायर की है। हाईकोर्ट अब इस मामले में सुनवाई की तारीख तय करेगा। याचिका दायर करने वाले एडवोकेट ओम प्रकाश सोलंकी ने कहा- संविधान में डिप्टी सीएम पद का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद दीया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने डिप्टी सीएम के नाम शपथ ली है। यह कानूनी तौर पर गलत है। हाईकोर्ट में इसे लेकर याचिका पेश की गई है।
याचिका दायर करने वाले वकील ने दिया ये तर्क
याचिका दायर करने वाले वकील ने तर्क दिया- डिप्टी सीएम मंत्री ही होता है, केवल राजनीतिक पोस्ट है। दोनों ने मंत्री की जगह डिप्टी सीएम की शपथ ली है, जब डिप्टी सीएम का पद संविधान में है ही नहीं तो आप शपथ कैसे ले सकते हैं। दोनों की नियुक्ति को रद्द किया जाना चाहिए।
कैबिनेट मंत्री की जगह ली डिप्टी सीएम पद की शपथ
राजस्थान में पहले भी डिप्टी सीएम बनते रहे हैं। भैरोंसिंह शेखावत सरकार में (Rajasthan Deputy CM) हरिशंकर भाभड़ा डिप्टी सीएम बने थे। अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार में 2002 में कमला बेनीवाल और बनवारीलाल बैरवा डिप्टी सीएम बने थे। 2018 में सचिन पायलट डिप्टी सीएम बनाए गए थे। इन सब नेताओं ने डिप्टी सीएम की जगह कैबिनेट मंत्री की ही शपथ ली थी। हालांकि इस बार राजस्थान के साथ ही छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में डिप्टी सीएम बने नेताओं ने कैबिनेट मंत्री की जगह डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी।
सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका डिप्टी सीएम की शपथ पर आपत्ति
डिप्टी सीएम के पद की शपथ को लेकर पहले भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट (Rajasthan Deputy CM) में याचिकाएं दायर हुई हैं। डिप्टी सीएम की शपथ पर आपत्ति को सुप्रीम कोर्ट 1990 में खारिज कर चुका है। कर्नाटक, पंजाब-हरियाणा, बॉम्बे हाईकोर्ट में भी डिप्टी सीएम की शपथ पर आपत्ति जताते हुए नियुक्ति अवैध घोषित करने की याचिकाएं दायर हुईं, सब जगह याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया था कि डिप्टी सीएम को भी संविधान के आर्टिकल 164(3) के तहत शपथ दिलाई जाती है, डिप्टी सीएम की शपथ लेना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है।