Jaipur: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे एशिया (Rajasthan Tunnel) का पहला ऐसा हाईवे है, जिसे टाइगर रिजर्व के बीच से गुजारने के लिए आठ लेन की दो ग्रीन ओवरपास टनल बनाई जा रही हैं। कोटा के मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की पहाड़ियों के नीचे से 4.9 किमी लंबी सुरंग बन रही है, जहां ऊपर से टाइगर गुजरेंगे और नीचे से गाड़ियां। यह पहली साउंडप्रूफ और वाटरप्रूफ टनल होगी, जिसमें से गुजरने वाले वाहनों का शोर वन्यजीवों को परेशान नहीं करेगा। ऑस्ट्रेलिया की नई तकनीक से बनने वाला यह टनल सेंसर से लैस होगा। ये करीब 1200 करोड़ की लागत से बनकर दिसंबर 2024 तक तैयार हो जाएगा।
देश की सबसे बड़ी टनल में होगी शुमार
देश में किसी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बनने वाली यह पहली सुरंग होगी। ऊपर से टाइगर और दूसरे वन्यजीव गुजरेंगे और नीचे दो टनल में से वाहन। हाईवे निर्माण के दौरान टाइगर रिजर्व का ये हिस्सा रास्ते में आ रहा था। ऐसे में इस सुरंग का निर्माण करवाया जा रहा है ताकि टाइगरों को कोई परेशानी न हो।
ऐसे बनेगी टाइगर रिजर्व में देश की सबसे बड़ी टनल
1. पहाड़ के नीचे 3.3 किलोमीटर लंबी दो टनल बनेगी
कोटा एनएचएआई के डीजीएम राकेश कुमार मीणा ने बताया कि पहाड़ को नीचे से काटकर 3.3 किमी लंबी टनल बनाई जाएगी। बाहर सीमेंट से बनी 1.6 किमी सुरंग को मिलाकर पूरी टनल 4.9 किमी की होगी। यह टनल मुकुंदरा टाइगर रिजर्व हिल्स से 500 मीटर पहले ही शुरू हो जाएगी। पहाड़ के नीचे दो टनल बनाई जा रही है। यह एक-दूसरे के पास से गुजरेगी। एक टनल से वाहनों के जाने का रास्ता होगा। दूसरी टनल से वाहनों के आने का रास्ता होगा। टनल में चार लेन का ट्रैफिक गुजरेगा। दोनों टनल को मिलाकर कुल 8 लेन की सड़क होगी।
2. दोनों टनल आपस में 9 पॉइंट पर मिलेंगे
कोटा से मुकुंदरा हिल्स की तरफ जाने वाली टनल को पी-1 और दूसरी टनल को पी-2 नाम दिया गया है। एक टनल में 15 मीटर चौड़ा रास्ता होगा। जिसमें चार लेन सड़क होगी। इसकी ऊंचाई करीब 11 मीटर रहेगी। दोनों एक टनल को 9 अलग-अलग जगहों से जोड़ा जाएगा। ताकि टनल में कोई हादसा या जाम लगने पर ट्रैफिक को एक टनल से दूसरी टनल में डायवर्ट कर सकेंगे।
3. टनल के बाहर सीमेंट और कंक्रीट की 1.6 किलोमीटर की सुरंग
इंजीनियर दुर्गा नारायण ने बताया कि टनल (Rajasthan Tunnel) के दोनों तरफ 1.6 किलोमीटर लंबी सीमेंट और कंक्रीट की सुरंग बनाई जाएगी। यह जमीन से करीब 30 फीट गहरी होगी। इस हिस्से को शेड से कवर किया जाएगा जो 10.5 मीटर ऊंचा और 9 मीटर चौड़ा स्टील केनोपी ब्रिज जैसा होगा। टनल का काम पूरा होने के बाद इसे ऊपर से सीमेंट और कंक्रीट से ढका जाएगा। इसके बाद ऊपर पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। ताकि वन्यजीवों को बिलकुल भी एहसास न हो की नीचे कोई टनल है।
4. साउंड प्रूफ और वाटरप्रूफ होगी टनल
डीबीएल कंपनी के प्रतिनिधि संजय राठौड़ ने बताया कि टनल को साउंडप्रुफ बनाया जा रहा है। इस टनल के अंदर से गुजरने वाले वाहनों की आवाज पहाड़ी से गुजर रहे जानवरों को सुनाई नहीं देगी। इसके लिए टनल की दीवारों पर ग्रटिंग की जा रही है। सीमेंट, लेदर और प्लास्टिक की लेयर से दीवारों को कवर किया जाता है। इसके कवर के बाद टनल वाटरप्रूफ और साउंडप्रूफ रहेगी।
5. टनल के अंदर गाड़ी रुकी तो मिलेगा अलर्ट
टनल में सभी तरह के सेंसर लगाए जा रहे हैं। यह टनल स्मोक सेंसर के अलावा पॉल्यूशन कंट्रोल, व्हीकल मैनेजमेंट, फ्रेश एयर, वाईफाई और सीसीटीवी से लैस होगा। सेंसर सिस्टम और सीसीटीवी से टनल के अंदर किसी भी गाड़ी के रुकते ही कंट्रोल रूम में अलर्ट का मैसेज मिलेगा। फिर टीम मौके पर पहुंच जाएगी। अगर गाड़ी में कुछ समस्या होगी तो उसे ले-बाय में ले जाकर ठीक करवाया जाएगा। टनल के अंदर वाहनों के रुकने पर पाबंदी रहेगी।
6. बंदर-हिरण जैसे जानवरों के लिए हाईवे के नीचे रास्ता
टनल से पहले और बाद में एक्सप्रेस वे पर 2 अंडरपास और 2 पाइप लगेंगे, ताकि सांप, मेंढक, बिच्छू जैसे जमीन व पानी के पास रहने वाले जीवों व छोटे जानवरों का रास्ता बाधित न हो। दोनों तरफ डिवाइडर पर ट्री ब्रिज बनेंगे, जो पक्षियों को सड़क पर आने से रोकेंगे। अचानक से कोई वन्यजीव कूदकर एक्सप्रेस-वे नहीं आ जाए, इसलिए स्टील के तारों की फेंसिंग लगाई जाएगी। इसकी ऊंचाई 80 सेमी से ज्यादा और जमीन के नीचे 20 सेमी होगी। वहीं बंदरों को रोकने के लिए सड़क के दोनों ओर 1 मीटर से ज्यादा ऊंची स्टील की रेलिंग भी लगेगी।
7. आवाज रोकेंगे मिट्टी के ढेर, रोशनी के लिए एंटी ग्लेयर बैरियर
वन्यजीवों तक वाहनों की आवाज और रोशनी रोकने के लिए 3 से 5 मीटर ऊंचे मिट्टी के बर्म (पटरियां), सीसी पैनल, पत्थरों को जिग जैग रखा जाएगा। रोशनी रोकने को एंटी ग्लेयर बेरियर्स पर ऐसा पेंट होगा जो लाइट रोकता है। 60 मीटर ऊंचे पेड़ लगेंगे।
8. वायु प्रदूषण रोकने को विशेष स्क्रीन, 60 किमी ग्रीन बेल्ट होगी
गाड़ियों का धुआं रोकने के लिए जंगल में एक्सप्रेस-वे के करीब 60 किमी दायरे में लोकल प्रजातियों के पेड़-पौधे के बीज डालकर ग्रीन बेल्ट स्थापित की जाएगी। गाड़ियों के कंपन के प्रभाव को कम करने के लिए अलग से उपाय होंगे।
ऑस्ट्रेलियन मेथड और स्वीडन की जंबो मशीन से बन रही है टनल
1. ऑस्ट्रेलियन मेथड से बन रही है टनल
टनल इंजीनियर नारायण कुमार ने बताया कि टनल को ऑस्ट्रेलियन टनल मेथड (नेटम) से बनाया जा रहा है। नेटम तकनीक में हर दिन खुदाई के बाद मॉनिटरिंग की जाती है। टनल के लिए जरूरी स्ट्रक्चर को बनाया जाता है। इसके लिए हर दिन मीटिंग करके तय किया जाता है कि आज कहां, कैसे काम किया जाएगा। काम पूरा होने के बाद उसकी मॉनिटरिंग होती है और फिर अगले दिन की प्लानिंग की जाती है।
टनल को बनाने में 700 से ज्यादा लेबर लगातार काम कर रही है।
2. हर दिन 16 ब्लास्ट करके खुदाई की जाती है
टेक्निकल स्टाफ पंकज कुमार ने बताया कि टनल में काम करते समय सेफ्टी का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है। टनल में रोजाना 7 से 8 मीटर की खुदाई की जाती है। इसके लिए एक दिन में 16 ब्लास्ट किए जाते हैं। जिसमें एक तरफ की टनल में चार ब्लास्ट और दूसरी तरफ भी चार ब्लास्ट किए जाते हैं। सबसे तेजी से काम कोटा की तरफ से किया जा रहा है। हर दिन पांच मीटर खुदाई हो पाती है। चेचट की तरफ चट्टान कमजोर होने के कारण काम धीमी गति से हो रहा है।
3. स्वीडन की मशीनों से खुदाई
टनल में पहाड़ को काटकर ड्रिल करने के लिए स्वीडन से मंगवाई जंबो मशीन से ड्रिलिंग की जाती है। जिसके बाद चट्टानों में विस्फोटक भरा जाता है और ब्लास्टिंग की जाती है।
4. सुरंग बनाने में 700 लेबर, 80 इंजीनियर-सुपरवाइजर कर रहे 24 घंटे काम
सुरंग को बनाने में 700 से ज्यादा मजदूर दिन-रात काम में जुटे हुए हैं। 40 इंजीनियर और 40 सुपरवाइजर का स्टाफ अलग से लगाया गया है। इंजीनियर दावा कर रहे हैं कि इस सुरंग की लाइफ 100 साल से भी ज्यादा की होगी। इसे बनाने में करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।
दिसंबर 2024 तक टनल का काम पूरा हो जाएगा
कोटा एनएचएआई के डीजीएम राकेश कुमार मीणा (Rajasthan Tunnel) ने बताया कि दिसंबर 2024 तक टनल के निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा। अभी करीब 2 किलोमीटर तक टनल के अंदर खुदाई का काम हो चुका है। सबसे ज्यादा काम कोटा की तरफ से हुआ है। टनल में 24 घंटे काम चल रहा है।
राजस्थान में तीन टाइगर रिजर्व से गुजरेगा एक्सप्रेस वे
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे राजस्थान में रणथंभौर नेशनल पार्क, बूंदी का रामगढ़ टाइगर रिजर्व और कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजरेगा। वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसके लिए हाईवे को रिजर्व के साइलेंट कॉरिडोर से गुजारा जाएगा।