Jaipur: बाड़मेर के आदर्श स्टेडियम में पीएम नरेंद्र मोदी (Rajasthan Politics) की आम सभा से पहले ही मानवेंद्र सिंह ने भाजपा में घर वापसी कर ली। छह महीने पहले ही वे इसका संकेत दे चुके थे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया आईडी से कांग्रेस का सिंबल हटाया और अटल बिहारी वाजपेयी व पिता जसवंत सिंह की फोटो लगाई थी। वे कांग्रेस से नाराज चल रहे थे। 59 साल के मानवेंद्र सिंह बालोतरा के जसोल गांव से हैं। उनके पिता जसवंत सिंह जसोल भाजपा के कद्दावर नेता रहे और अटल बिहारी सरकार में वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री जैसे पदों पर रहे। मानवेंद्र ने कांग्रेस में शामिल होकर 2 विधानसभा चुनाव लड़े और 1 लोकसभा चुनाव, उन्हें तीनों चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
मानवेंद्र ने 2018 में भाजपा छोड़ी, कांग्रेस में गए
2018 में उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ दिया था। वे कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस ने उन्हें तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे के सामने चुनावी मैदान में उतार दिया। मानवेंद्र बुरी तरह हारे। इसके बाद कांग्रेस ने 2019 में लोकसभा चुनाव में बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से भाजपा के कैलाश चौधरी के सामने मैदान में उतारा। लेकिन लोकसभा चुनाव में भी मानवेंद्र को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। लगातार विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस ने मानवेंद्र को सैनिक कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया।
कांग्रेस ने नाराजगी क्यों ?
2023 के विधानसभा चुनाव में मानवेंद्र जैसलमेर से चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्हें विश्वास था कि वे जैसलमेर से लड़े तो चुनाव जीत जाएंगे। उन्होंने तैयारी भी कर ली थी। लेकिन कांग्रेस ने उन्हें सिवाना विधानसभा सीट से टिकट दिया। वे सिवाना से चुनाव लड़े तो कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील परिहार बागी हो गए। कांग्रेस दो भागों में बंट गईं। मानवेंद्र सिंह हार कर तीसरे स्थान पर पहुंच गए। मनचाही सीट से टिकट न मिलने के कारण मानवेंद्र कांग्रेस से नाराज थे। इसके बाद कांग्रेस ने अपने बागी नेता सुनील परिहार को कांग्रेस में वापस लिया तो मानवेंद्र का मन उखड़ गया। बगावत करने वाले सुनील परिहार और फतेह खान को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। लेकिन मार्च 2024 में इन दोनों के निष्कासन को समाप्त कर फिर से वापस कांग्रेस में शामिल कर दिया। इसके बाद मानवेंद्र सिंह जसोल ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस पर तंज कंसते पोस्ट शेयर की थी।
जनवरी 2024 में मीडिया अकाउंट से हटाया था कांग्रेस का सिंबल
जनवरी 2024 में उन्होंने मीडिया अकाउंट (Rajasthan Politics) से कांग्रेस का सिंबल हटा दिया। इसके स्थान पर जब उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पिता जसवंत सिंह का फोटो लगाया तो चर्चा तेज हो गई कि मानवेंद्र भाजपा में लौट सकते हैं। भाजपा राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने ऐलान किया कि बाड़मेर में आदर्श स्टेडियम में मोदी की सभा में मानवेंद्र भाजपा में घर वापसी करेंगे। होली से पहले सीएम भजनलाल शर्मा जब जोधपुर आए थे तब मानवेंद्र सिंह की बंद कमरे करीब एक घंटे तक चर्चा भी हुई थी।
कौन हैं मानवेंद्र सिंह जसोल
19 मई 1964 में जोधपुर में जन्मे मानवेंद्र सिंह भाजपा के दिग्गज नेता रहे जसवंत सिंह जसोल के बेटे हैं। वे 2004 से 2009 तक बाड़मेर-जैसलमेर सीट से सांसद रहे। इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बाड़मेर की शिव विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीते। 2018 में मानवेंद्र और तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मतभेद उजागर हुए और वे भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए। वसुंधरा राजे से नाराजगी की वजह पिता जसवंत सिंह को बाड़मेर-जैसलमेर से टिकट न देना भी था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 2014 में मानवेंद्र के पिता जसवंत बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। वसुंधरा राजे ने कांग्रेस से भाजपा में आए कर्नल सोनाराम को लोकसभा का टिकट दे दिया। बागी होकर जसवंत निर्दलीय मैदान में उतर गए। कर्नल सोनाराम के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद जसोल परिवार की भाजपा से बगावत शुरू हो गई। पार्टी ने जसवंत सिंह को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। 7 अगस्त 2014 को जसवंत घर में बाथरूम में फिसल गए। 6 साल वे कोमा में रहे। दिल्ली के सेना अस्पताल में 2020 में उनका निधन हो गया। मानवेंद्र के साथ भी 30 जनवरी 2024 अलवर में नेशनल हाइवे भीषण कार हादसा हुआ। जिसमें उनकी पत्नी चित्रा सिंह का निधन हो गया। भाजपा से अलग होकर न तो जसवंत अपना राजनीतिक दमखम बरकरार रख सके और न मानवेंद्र कांग्रेस में कुछ कमाल कर सके। ऐसे में मानवेंद्र भाजपा में लौटकर अपना खोया हुआ वजूद दोबारा हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं।