Jaipur: ओल्ड पेंशन स्कीम और न्यू पेंशन स्कीम (Rajasthan Old Pension Scheme) को लेकर एक बार फिर राजस्थान की राजनीति में हलचल मच गई है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य की भाजपा सरकार लोकसभा चुनाव के बाद गहलोत सरकार के ओल्ड पेंशन स्कीम के फैसले को पलट देगी। भजनलाल सरकार अधिकारियों-कर्मचारियों को वापस न्यू पेंशन स्कीम के दायरे में लाना चाह रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने यह मुद्दा उठाया और भाजपा पर जमकर आरोप जड़े। राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर रुख स्पष्ट करने को भी कहा। हालांकि, अब तक राज्य सरकार की ओर से सदन में कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है।
एक्शन में आए मंत्री किरोड़ी लाल मीणा
इधर, कृषि विभाग के 3 नियुक्ति आदेशों (Rajasthan Old Pension Scheme) से शुरू हुए इस विवाद से कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा एक्शन मोड में आ गए। लापरवाही के कारण आला अधिकारियों पर नाराजगी जताई और जांच के आदेश दे दिए। आखिर भजनलाल सरकार के किस विभागीय आदेश के कारण OPS-NPS का मुद्दा छाया? क्या कोई चूक हुई, जिससे ये कन्फ्यूजन पैदा हुआ? भजनलाल सरकार क्या गहलोत सरकार के OPS के फैसले को पलट सकती है? ‘इस सरकार में प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात करने के लिए दिल्ली से पर्ची आ चुकी है। सरकार केवल लोकसभा चुनाव का इंतजार कर रही है। सरकार OPS पर अपना रूख स्पष्ट करें। कर्मचारी भी चाहते है कि सरकार OPS पर अपनी मंशा बताए।'
RPSC ने तीन तरह के पदों पर निकाली थी नियुक्ति
RPSC ने सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी के तीन तरह के पदों (रसायनिक, वनस्पति और पौध व्याधि) पर नियुक्ति निकाली थी। परीक्षा संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कृषि विभाग को नियुक्ति पत्र जारी करना था। गत 22 जनवरी को कृषि विभाग ने चयनित सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारियों के नियुक्ति के 3 आदेश जारी किए। कृषि विभाग के इन ऑर्डरों में चयनित सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारियों (रसायनिक, वनस्पति और पौध व्याधि) की नियुक्ति आदेशों में शर्त नंबर 2 में OPS के बजाय NPS का जिक्र था।
2004 से लागू की गई थी NPS
'नवनियुक्त अधिकारियों के लिए अंशदायी पेंशन योजना (Rajasthan Old Pension Scheme) वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 20.01.2004 एवं 13.03.2006 के अनुसार लागू होगी।' मतलब यह कि प्रदेश में 2004 से OPS बंद कर NPS लागू की गई थी। लेकिन आदेश की शर्त नंबर 2 कह रही थी कि इन अधिकारियों को OPS के बजाए मार्केट बेस अंशदायी पेंशन योजना यानी NPS का लाभ ही दिया जाएगा। इन आदेशों के बाद से ही यह मुद्दा सियासी गलियारों में भी उठने लगा और विधानसभा तक पहुंच गया। आमजन में भी इस मुद्दे की चर्चा रही।
क्या हुआ जब मंत्री मीणा तक पहुंची आदेश संबंधी चर्चा
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा तक जब आदेश संबंधी चर्चा पहुंची कि सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारियों के नियुक्ति आदेश में दी गई सेवा शर्तों में NPS का जिक्र है, तो उन्होंने आला अधिकारियों से जवाब-तलब किया। मंत्री ने अधिकारियों से तुरंत कन्फ्यूजन दूर करने को कहा। सूत्रों के अनुसार मंत्री ने कृषि विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी वैभव गालरिया को इस मामले में कृषि आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी की लापरवाही मानते हुए नोटिस देने तक के निर्देश दे दिए। इसके बाद कृषि विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए और विभाग में हंगामा मच गया। अधिकारियों को अपनी गलती का अहसास हो गया था। अधिकारियों ने आदेशों में दिए गए सेवा शर्त नंबर 2 के लिए संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी।
कृषि विभाग ने 23 जनवरी को स्थिति स्पष्ट की और संशोधन आदेश में लिखा...
'22 जनवरी को सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (रसायनिक), सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (वनस्पति) और सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) के पदों पर नियुक्ति आदेश जारी किए थे। इन आदेशों में नियुक्तियों की शर्तों के तहत अंकित बिन्दु संख्या 2 को विलोपित किया जाता है।' मतलब साफ है कि कृषि विभाग ने संशोधन आदेश में तीनों पदों पर निकाली गए नियुक्ति आदेश से शर्त नंबर 2 को हटा दिया गया है। इससे कन्फ्यूजन दूर हो गया कि NPS के बजाय इन पदों पर नियुक्त होने वाले अधिकारियों को OPS का ही लाभ मिलेगा। एक दिन पूर्व आए संधोधित आदेश के बावजूद बुधवार को विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामा हुआ और विपक्ष ने शक जताया कि नई सरकार लोकसभा चुनाव के बाद OPS को बंद कर NPS लागू करने की मंशा रखती है।