Jaipur: 10 साल पहले वसुंधरा सरकार के समय (Rajasthan Politics) एकल पट्टा मामले में विधायक शांति धारीवाल सहित तीन अन्य अधिकारियों पर लगे आरोपों पर भजनलाल सरकार ने क्लीन चिट दे दी है। राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए जवाब में कहा गया है कि एकल पट्टा प्रकरण में कोई मामला नहीं बनता है। एकल पट्टा प्रकरण में पूरी तरह से नियमों की पालना की गई थी। वहीं, इसमें राज्य सरकार को किसी भी तरह का वित्तीय नुकसान भी नहीं हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 29 जून 2011 में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम एकल पट्टा जारी किया था। इसकी शिकायत परिवादी रामशरण सिंह ने 2013 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो( एसीबी) में की थी। एसीबी में शिकायत के बाद तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, शैलेंद्र गर्ग और दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इनके खिलाफ एसीबी कोर्ट में चालान पेश किया था। मामला बढ़ने पर विभाग ने 25 मई 2013 को एकल पट्टा निरस्त कर दिया था।
ACB ने शांति धारीवाल से भी की थी पूछताछ
वहीं, इस मामले में एसीबी ने शांति धारीवाल से भी पूछताछ की थी। लेकिन अब भजनलाल सरकार ने इस मामले में सभी को क्लीन चिट दे दी है। दिलचस्प तथ्य यह है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी में चुनावों के बीच 22 अप्रैल को जवाब पेश किया है। इसमें सरकार ने कहा है कि एकल पट्टा प्रकरण में कोई मामला नहीं बनता है।
गहलोत सरकार ने दी थी क्लीन चिट
एकल पट्टा प्रकरण में तत्कालीन वसुंधरा सरकार के समय 3 दिसंबर 2014 को एसीबी ने मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों को खिलाफ चालान भी पेश किया था। उस समय तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से भी पूछताछ की गई थी। लेकिन प्रदेश में सरकार बदलते ही गहलोत सरकार में एसीबी ने मामले में तीन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी। तीनों क्लोजर रिपोर्ट में सरकार ने इस मामले में पूर्व आईएएस जीएस संधू, पूर्व आरएएस निष्काम दिवाकर और ओंकरामल सैनी को क्लीन चिट दी थी।
2022 की रिपोर्ट में पाई गई थी अनिमित्ताएं
एसीबी की दो क्लोजर रिपोर्ट को एसीबी कोर्ट (Rajasthan Politics) ने खारिज करते हुए 18 अप्रैल 2022 को कुछ बिंदुओं पर डीआईजी स्तर के अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए थे। उसके बाद एसीबी की ओर से 19 जुलाई 2022 को तीसरी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी। इसमें भी एसीबी ने एकल पट्टा प्रकरण में किसी भी तरह अनियमित्ताएं नहीं पाई थीं। इस पर एसीबी ने कोर्ट से इन आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट को वापस लेने की एप्लिकेशन लगाई थी। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। लेकिन इनकी अपील पर 17 जनवरी 2023 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संधू, दिवाकर और सैनी के खिलाफ केस वापस लेने को सही माना था। इस दौरान मामले में परिवादी रामशरण सिंह की मृत्यु के बाद उनके बेटे सुरेंद्र सिंह ने भी केस वापस लेने की सहमति दी थी।
धारीवाल को हाईकोर्ट से मिली थी राहत
इस पूरे मामले में परिवादी की ओर से शांति धारीवाल को भी आरोपी बनाने का प्रार्थना-पत्र लगाया गया था। इसके खिलाफ धारीवाल ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने धारीवाल को राहत देते हुए 15 नवंबर 2022 को एसीबी कोर्ट में चल रही प्रोटेस्ट पिटीशन सहित अन्य आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया था। धारीवाल की ओर से कहा गया था कि उनका एफआईआर से लेकर चालान में कहीं भी नाम नहीं है। एसीबी की ओर से पेश क्लोजर रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ कोई अपराध प्रमाणित नहीं माना गया। लेकिन उसके बाद भी एसीबी कोर्ट ने प्रकरण में अग्रिम जांच के आदेश दिए, जो कि गलत है।
हाईकोर्ट के फैसले को दी गई थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ आरटीआई एक्टिविस्ट अशोक पाठक (Rajasthan Politics) ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। एसएलपी में कहा गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज केस की एफआईआर को केवल शिकायतकर्ता के राजीनामे के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। यह राज्य सरकार का केस है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार केस को वापस लेना जनहित में नहीं है। इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप होते हुए भी राज्य सरकार की कार्रवाई को सही माना है, जो गलत है। इसलिए हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया जाए। इस एसएलपी में भी सुप्रीम कोर्ट धारीवाल को नोटिस जारी कर चुका है।