Jaipur: जूनियर इंजीनियर (जेईएन) पेपर लीक 2020 (Paperleak Case) के मास्टरमाइंड पटवारी हर्षवर्धन मीणा ने राजस्थान एसओजी के सामने कई बड़े खुलासे किए हैं। पूछताछ में हर्षवर्धन ने जेईएन के अलावा भी कई पेपर लीक करवाने और 100 से ज्यादा लोगों को SI, पटवारी, टीचर से लेकर सरकारी नौकरी दिलवाने की बात मानी है। अभी एसओजी उन अभ्यर्थियों तक पहुंचने का प्लान बना रही है, जिन्हें हर्षवर्धन ने पास करवाया है। आरोपी की पत्नी भी भीलवाड़ा में पटवारी के पद पर तैनात है, जिससे एसओजी पूछताछ कर सकती है।
पूरे राजस्थान में है नेटवर्क
उसकी गैंग पेपर लीक करवाने वाली टॉप 5 गैंग में शामिल है, जिसका पूरे राजस्थान में नेटवर्क है। जेईएन भर्ती का पेपर उसने एग्जाम से 2 घंटे पहले ही लीक करवा दिया था। लेकिन एक गलती के चलते पेपर वायरल हो गया। छापेमारी के डर से हर्षवर्धन नेपाल भाग गया और किराए का कमरा लेकर फरारी काट रहा था। वहां शॉपिंग करने घर से बाहर निकलते ही हर्षवर्धन को पुलिस ने दबोच लिया।
पिछले 25 साल से टीचर पद पर कार्यरत हैं राजेन्द्र यादव
जयपुर के खातीपुरा स्थित शहीद दिग्विजय सिंह सुमेल राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल से पेपर लीक किया गया था। इसी स्कूल में राजेन्द्र यादव पिछले 25 साल से टीचर के पद पर कार्यरत है। 9 दिसंबर 2020 को परीक्षा वाले दिन राजेंद्र यादव 2 घंटे पहले ही स्ट्रॉन्ग रूम में घुस गया था। उसने फनर (ब्लेड) से पेपर के बंडल की सील उखाड़ी और पेपर की फोटो खींचकर वॉट्सऐप के जरिए हर्षवर्धन मीणा को भेजी थी। हर्षवर्धन मीणा ने आगे लाखों रुपए में इस पेपर का पहले से सौदा कर रखा था। इसी दौरान राजेंद्र यादव से एक गलती हो गई। हड़बड़ी में एक दो दूसरे नंबरों पर भी उसने पेपर वॉट्सऐप कर दिया, जिससे कुछ ही देर में पेपर वायरल हो गया। वायरल होने की खबरें आने के बाद पेपर को रद्द कर कर दिया गया था।
पुलिस दबिश से पहले ही आरोपी नेपाल भाग जाया करता था
एसओजी ने इस दौरान अज्ञात लोगों के (Paperleak Case) खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पेपर लीक के बाद कई बार पुलिस टीमें आरोपी हर्षवर्धन से पूछताछ के लिए उसके महवा (दौसा) स्थित घर पहुंची थी। पुलिस दबिश से पहले ही आरोपी नेपाल भाग जाया करता था। 23 जनवरी 2024 से हर्षवर्धन मीणा पर एसओजी ने 50 हजार रुपए के इनामी घोषित कर रखा था।
पुलिस से बचने के लिए अपनाते थे ये रास्ता
पेपरलीक कांड के मुख्य सरगना हर्षवर्धन मीणा ने बार-बार पुलिस की रेड को देखते हुए नेपाल में जाकर एक मकान किराए पर ले लिया था। इसमें वह अपने अन्य साथियों के साथ फरारी काट रहा था। आरोपी राजेंद्र यादव और हर्षवर्धन नेपाल जाने के लिए बस और ट्रेन का इस्तेमाल करते थे, ताकि भीड़ में पुलिस की नजर नहीं पड़े। आरोपी जयपुर से आगरा और आगरा से गोरखपुर जाते थे। गोरखपुर पहुंचकर वह सुनौली के रास्ते नेपाल में दाखिल हो जाते थे। नेपाल में उन्होंने सिम भी ले लिया था जिसके कारण उन्हें ट्रैक करना और भी कठिन हो गया था।
शॉपिंग करने निकले थे आरोपी, पुलिस ने दबोचा
SOG को हर्षवर्धन मीणा के नेपाल में ठिकाने का पता चल गया था। उसे पकड़ने के लिए टीम ने नेपाल पुलिस के साथ जानकारी साझा की। पुख्ता होने के बाद उसे गिरफ्तार करने के लिए टीम रवाना की गई। आरोपी किराए के कमरे से कम ही बाहर निकलते थे। रविवार को हर्षवर्धन मीणा अपने साथियों के साथ शॉपिंग करने निकला तभी टीम ने नेपाल पुलिस की मदद से शिकंजा कस लिया। बॉर्डर से नेपाल पुलिस ने आरोपियों को राजस्थान एसओजी के हवाले कर दिया, जिसे सोमवार को जयपुर लाकर पूछताछ की गई।
पेपर लीक गैंग में अधिकांश लोग सरकारी कर्मचारी
एडीजी एसओजी वीके सिंह ने बताया- महवा जिला दौसा निवासी हर्षवर्धन मीणा राजस्थान में पेपर लीक की सभी गैंग के साथ एक्टिव था। आरोपी पेपर लीक कराने वाली टॉप-5 गैंग में से एक में शामिल है। चौंकाने वाली बात ये है कि उसकी पेपर लीक गैंग में अधिकांश लोग सरकारी कर्मचारी हैं। अभी आरोपी के तीन साथी गिरफ्तार किए गए हैं, सभी सरकारी नौकरी में हैं। एक सब इंस्पेक्टर है तो एक लाइब्रेरियन, एक पटवारी और एक सरकारी टीचर। पुलिस को शक है कि ये सभी भी फर्जी तरीके से एग्जाम पास कर भर्ती हुए हैं।
एग्जाम में डमी कैंडिडेट बैठाकर निकलवाते थे इंटरव्यू
पेपर लीक सरगना हर्षवर्धन मीणा का पूरे राजस्थान (Paperleak Case) में नेटवर्क है, जो किसी भी सरकारी भर्ती के दौरान जहां पेपर को सुरक्षा में रखा जाता है, उस स्ट्रांग रूम से भी पेपर निकलवा लेता है। उसके नेटवर्क में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी बताए जाते हैं। एग्जाम में डमी कैंडिडेट बैठाने से लेकर सरकारी नौकरी में इंटरव्यू पास करवाने जैसे हर काम में उसका दखल है।
पेपर लीक के बाद सख्ती से नहीं हुई पूछताछ
स्कूल के टीचर राजेन्द्र यादव ने जब पेपर लीक किया तब उसमें स्कूल का सीरीयल नंबर भी लिखा था। यहीं से एसओजी को पता चल गया था कि पेपर कहां से लीक हुआ है। तब तत्कालीन एसओजी अधिकारियों ने स्कूल के पूरे स्टाफ को मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की थी। इस दौरान राजेन्द्र यादव भी शामिल था। लेकिन सख्ती से पूछताछ नहीं होने के चलते राजेन्द्र यादव अपनी करतूत पर पर्दा डालने में कामयाब रहा। मामूली पूछताछ के बाद स्कूल स्टाफ को छोड़ दिया गया था। अगर उसी दौरान सख्ती से पूछताछ करती और मोबाइल की जांच कर लेती तो राजेन्द्र यादव पहले ही पकड़ा जा सकता था।