Jaipur: लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान में भजनलाल सरकार (Bhajanlal Cabinet Expansion) का मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना है। इसके जरिए भाजपा जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने का प्रयास करेगी। केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिलने के बाद कभी भी मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है।
इतने मंत्री बनाए जा सकते हैं
मंत्रिमंडल विस्तार में तीन से चार मंत्री बनाए जा सकते हैं। भजनलाल सरकार में फिलहाल सीएम, दो डिप्टी सीएम को मिलाकर कुल 24 मंत्री हैं। कोटे के हिसाब से 30 मंत्री बन सकते हैं, ऐसे में छह मंत्रियों की जगह खाली है। सियासी समीकरणों के हिसाब से विस्तार में तीन मंत्री बनाकर तीन जगह खाली रखी जा सकती है।
ये हैं मंत्री पद के दावेदार
भजनलाल सरकार में अभी कोई यादव मंत्री नहीं है, ऐसे में जसवंत यादव और बाबा बालकनाथ में से एक को मंत्री बनाया जा सकता है। नहरी क्षेत्र के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों से गुरवीर बराड़ का नाम दावेदारों में है। पहले श्रीकरणपुर उपचुनाव के बीच सुरेंद्र पाल सिंह टीटी को मंत्री बनाया था, लेकिन उपचुनाव हारते ही टीटी ने इस्तीफा दे दिया, अभी श्रीगंगारनगर-हनुमानगढ़ जिलों से कोई मंत्री नहीं है। वैश्य समाज से अभी केवल एक मंत्री है, यह वर्ग बीजेपी का परंपरागत वोटर है। हमेशा से दो से तीन मंत्री बनते आए हैं, वैश्य समाज से दीप्ति माहेश्वरी, प्रताप सिंह सिंघवी, कालीचरण सराफ के नाम दावेदारों में है। सिंधी समाज से हर बार मंत्री बनता है, लेकिन इस बार नहीं बनाया गया है। सिंधी समाज से श्रीचंद कृपलानी दावेदार हैं। बांसवाड़ा-डूंगरपुर से भी एक मंत्री बनाया जा सकता है।
सीएम भजनलाल ने की राज्यपाल से मुलाकात
सीएम भजनलाल शर्मा ने सोमवार (Bhajanlal Cabinet Expansion) दोपहर बाद राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की। राज्यपाल से सीएम की इस मुलाकात को मंत्रिमंडल में फेरबदल या बड़ी राजनीतिक नियुक्तियों से जोड़कर देखा गया है। हालांकि राजभवन और सीएमओ ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है। सीएम और राज्यपाल के बीच शिष्टाचार मुलाकातें होती रहती हैं।
16 जिलों से मंत्रिमंडल में कोई नहीं
भजनलाल सरकार में अभी 17 जिलों से सीएम को मिलाकर 24 मंत्री हैं। अब भी 16 जिले ऐसे हैं, जहां से कोई मंत्री नहीं है। जिन 16 जिलों से कोई मंत्री नहीं बना। उनमें कुल 75 सीटें आती हैं। इनमें से 36 सीटें बीजेपी ने जीती हैं। इसकी वजह से अलग-अलग इलाकों में नाराजगी के सुर उठने शुरू हो गए हैं। बारां, झालावाड़, बूंदी, धौलपुर, हनुमानगढ़, झुंझुनूं, चूरू, भीलवाड़ा, राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, करौली, दौसा, जैसलमेर, जालौर, श्रीगंगानगर जिलों से कोई मंत्री नहीं है। हालांकि बूंदी और धौलपुर से बीजेपी से कोई विधायक जीतकर नहीं आया।
कांग्रेस की सरकार में उन 16 जिलों से थे 12 मंत्री
जिन 16 जिलों से बीजेपी ने कोई मंत्री नहीं बनाया, उनमें 8 जिलों में गहलोत सरकार में 12 मंत्री थे। कांग्रेस राज के दौरान बारां से प्रमोद जैन भाया, बूंदी जिले से अशोक चांदना, झुंझुनूं जिले से बृजेंद्र ओला और राजेंद्र गुढ़ा, भीलवाड़ा से रामलाल जाट, बांसवाड़ा से महेंद्रजीत मालवीय और अर्जुन बामणिया, करौली जिले से रमेश मीणा, दौसा जिले से परसादीलाल मीणा, मुरारी मीणा, ममता भूपेश, जैसलमेर जिले से शाले मोहम्मद मंत्री थे।
क्षेत्रीय संतुलन की कमी
अकेले जयपुर जिले से सीएम, दो डिप्टी सीएम और एक कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि भीलवाड़ा, राजसमंद जैसे बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले जिलों में कोई मंत्री नहीं है। नहरी क्षेत्र के दो जिलों और शेखावाटी के तीन जिलों में मिलाकर 31 विधानसभा और 4 लोकसभा सीटें हैं। विधानसभा चुनावों में 31 सीटों में से बीजेपी केवल 9 सीटें ही जीती है। शेखावाटी और नहरी क्षेत्र में सियासी संतुलन के लिए दो मंत्री बनाए हैं। नहरी क्षेत्र की सीट करणपुर से सुरेंद्रपाल सिंह टीटी को चुनाव के बीच मंत्री बनाया था लेकिन उपचुनाव हारने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। शेखावाटी के सीकर-झुंझुनूं और चूरू को मिलाकर तीन जिलों से एक मंत्री बनाया गया है।
मालवीय की बीजेपी में एंट्री से समीकरण साधने की कोशिश
वागड़ के तीन जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ में कुल 11 सीटें हैं। इनमें बीजेपी (Bhajanlal Cabinet Expansion) ने केवल तीन सीटें ही जीती हैं। भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) के बढ़ते दबदबे को देखते हुए यहां बीजेपी के लिए चुनौती है। प्रतापगढ़ से हेमंत मीणा को मंत्री बनाया, लेकिन इसका बांसवाड़ा और डूंगरपुर पर असर नहीं होता। ऐसे में डूंगरपुर और बांसवाड़ा से एक मंत्री बनाए जाने की उम्मीद है। हालांकि बीजेपी ने कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री महेंद्रजीतसिंह मालवीय को पार्टी में शामिल कर इस इलाके के सियासी समीकरण को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया है। मालवीय को बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।
क्षेत्रीय-जातीय संतुलन बनाना जरूरी
जिस इलाके से मंत्री बनते हैं। वहां सियासी रूप से पार्टी को फायदा होता है। लोकसभा चुनावों की ताजा चुनौती से पार पाने के लिए कमजोर इलाकों को साधने की रणनीति के तहत मंत्रिमंडल विस्तार भी एक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। जिन जातियों और क्षेत्रों से मंत्री नहीं हैं उन्हें मौका देकर समीकरण पक्ष में किए जाने का प्रयास हो सकता है।