राजस्थान का ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ किले की पहचान मुगल सम्राट अकबर के खिलाफ राजपूत प्रतिरोध के रूप में देखी जाती है। इस किले से ही महाराणा प्रताप ने मुगल बादशाह अकबर के खिलाफ महत्वपूर्ण जंग लड़ी थी। आज चित्तौड़गढ़ किला अपने अस्तित्व के लिए दोहरे खतरे का सामना कर रहा है। समय बीतने और आसपास की चूना पत्थर की खदानों से होने वाले विस्फोटों ने चित्तौड़गढ़ किले के अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
चित्तौड़गढ़ किले के 5 किमी के दायरे में विस्फोट पर रोक
शक्तिशाली मुगल सेना के खिलाफ अकेले युद्ध लड़ने वाले वीर राणा प्रताप सिंह के चित्तौड़गढ़ किले को अब सुप्रीम कोर्ट का समर्थन मिला है। हाल ही में एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यूनेस्को धरोहर स्थल से 5 किमी के दायरे में चूना पत्थर की खदानों में विस्फोट करने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। यह निर्णय किले की संरचनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस किले में विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ, पद्मिनी महल, कुंभा महल और मीरा मंदिर शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया विशेषज्ञों की एक टीम बनाने का निर्देश
अदालत ने आसपास के क्षेत्र में चूना पत्थर के अवैज्ञानिक और अत्यधिक दोहन पर चिंता व्यक्त की, जिससे किले और उसकी संरचनाओं के लिए खतरा पैदा हो रहा है। इन चिंताओं को दूर करने के लिए पीठ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनन विद्यालय), धनबाद के अध्यक्ष को सिविल इंजीनियरिंग, भूकंप इंजीनियरिंग, संरचनात्मक भूविज्ञान और खनन इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों की एक टीम बनाने का निर्देश दिया। यह दल चित्तौड़गढ़ किले के भीतर सभी संरचनाओं पर 5 किमी के दायरे से परे पर्यावरण प्रदूषण और विस्फोट कार्यों के प्रभाव पर एक व्यापक अध्ययन करेगा।