Jaipur: बांसवाड़ा संभाग में कांग्रेस के कद्दावर नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया (Rajasthan Politics) जल्द भाजपा जॉइन कर सकते हैं। भाजपा में शामिल होने से पहले दिल्ली में मौजूद मालवीया ने मीडिया में पहली बार कांग्रेस पर निशाना साधा और बिना नाम लिए कांग्रेस आलाकमान को भी घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा- कांग्रेस की जो स्थिति है वह आप सब देख रहे हैं। पार्टी में जो पहले विजन था, वो अब नहीं रहा। मुझे तीन साल तक मंत्री नहीं बनाया। मेरा पहले और अभी भी सीएलपी में मेरा नाम था। कांग्रेस कुछ लोगों के बीच घिर गई है।
अलर्ट मोड में कांग्रेस
मालवीया के भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस भी अलर्ट मोड़ में आ गई है। जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिले के तीन अन्य विधायक बांसवाड़ा से अर्जुनसिंह बामनीया, घाटोल से नानालाल निनामा और कुशलगढ़ विधायक रमीला खड़िया की जयपुर बुला लिया है। पूर्व मंत्री मालविया के इस कदम के बाद जिले की कांग्रेस में गहमागहमी बढ़ गई है। चर्चा यह भी है कि मालवीया गुट के नानालाल निनामा भी पार्टी छोड़ सकते हैं।
महेंद्र जीत मालवीया ने सीएम भजनलाल से की थी मुलाकात
मालवीया अगर कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन करते हैं तो प्रदेश की राजनीति में बड़ा झटका कांग्रेस को लगेगा। पार्टी के बड़े नेता और सीडब्लूसी मेंबर महेंद्र जीत सिंह मालवीया ने गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की थी। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस मीटिंग में दोनों के बीच समीकरण बैठे।
मालवीया ने बीजेपी जॉइन की पार्टी कई निशाने साध लेगी
मालविया ने भाजपा जॉइन की तो पार्टी एक साथ कई (Rajasthan Politics) निशाने साध लेगी। आगामी लोकसभा चुनाव के बाद पंचायतीराज चुनाव में भी इसका लाभ मिलेगा। बीते ढाई दशक से भाजपा जिला प्रमुख नहीं बना पाई है। मालविया की मुख्यमंत्री से मुलाकात, नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाने जैसी बातों ने मालवा और गुजरात से सटे इस लोकसभा क्षेत्र में इन सवालों और चर्चाओं को हवा दे दी है कि क्या वे पार्टी बदल रहे हैं? यदि ऐसा हुआ तो यह हरिदेव जोशी के मुख्यमंत्री बनने की भांति ही वागड़ की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पाइंट होगा।
वागड़ सीट पर टिकट की सुगबुगाहट
लोकसभा चुनाव समीप आने के साथ ही वागड़ में टिकट की सुगबुगाहट है। भाजपा में वर्तमान सांसद सहित अन्य वे दावेदार खम ठोक रहे हैं, जो विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित रहे। वहीं कांग्रेस को दोनों जिलों में पहचाने जाने वाले चेहरे की तलाश है। कांग्रेस में टिकट दोनों जिलों में बारी- बारी से दिया जाता है। इस बार बांसवाड़ा की बारी है। यहां बड़े चेहरे के रूप में CWC सदस्य महेन्द्रजीतसिंह मालविया हैं। वे अभी विधायक है। वे खुद चुनाव नहीं लड़ने की बात तो कह चुके हैं।
आदिवासी चेहरा हैं, राजनीति का लंबा अनुभव
महेंद्रजीत सिंह मालवीय को कांग्रेस का आदिवासी चेहरा (Rajasthan Politics) माना जाता रहा है। मालवीय के पास लंबा सियासी तजुर्बा है। वो सरपंच से लेकर, प्रधान, विधायक और सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं। दक्षिणी राजस्थान, ख़ास तौर पर बांसवाड़ा-डूंगरपुर में उनका मजबूत जनाधार है। अपने दम पर बिना किसी बड़े नेता के प्रचार कराए बांसवाड़ा की 5 में से 4 सीट जीती हैं। अब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी छोड़ने से पार्टी का तगड़ा झटका लगा है। पार्टी छोड़ने से वागड़ (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) में कांग्रेस पार्टी का काफी नुकसान हो सकता है। भाजपा उन्हें डूंगरपुर-बांसवाड़ा से लोकसभा का उम्मीदवार बना सकती है। जहां से अभी कनकमल कटारा सांसद हैं।