New Delhi: लोकसभा चुनाव की घोषणा अब कुछ (Rajasthan) ही दिनों में हो जाएगी और ऐसे में बीजेपी जोरो-शोरो से प्रत्याशी चयन में लगी हुई हैं। आपको बता दें कि भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 100 से अधिक मौजूदा सांसदों का टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव खेलने का निर्णय लिया है। अधिक उम्र, नॉन परफॉर्मर, जनता से जुड़ाव न रखने वाले या नए उभरते जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर ये टिकट काटे गए है। एक दर्जन सांसदों का टिकट तो क्षेत्र में जनता से सीधे लिए फीडबैक के आधार पर भी कटा है, जिसमे पार्टी को पता चला था कि न तो सांसद का फोन उठता था न ही उनका पीए फोन उठाता था। इस आचरण को पार्टी ने गंभीरता से लिया। यह जानकारी उच्च पदस्थ सूत्रों ने दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शुक्रवार देर रात 11 बजे से शुरू होकर तड़के 3.30 बजे तक केंद्रीय चुनाव समिति की मैराथन बैठक चली। बैठक से पहले पीएम मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ स्पेशल कोर कमेटी की बैठक कर टिकट वितरण फार्मूले पर मंथन किया।
राजस्थान में पहले फेज में 10 सीटों पर घोषित हो सकते हैं प्रत्याशी
केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में राजस्थान को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान करीब 10 सीटों पर निर्णय कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार जालोर सिरोही, चुरू और टोंक-सवाईमाधोपुर में प्रत्याशी बदलने पर चर्चा हुई। चूरू से देवेन्द्र झाझड़िया का नाम प्रमुखता से आया है। झाझड़िया पैरा ओलंपिक में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। जालोर-सिरोही से लुम्बाराम चौधरी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। यहां से सांसद देवजी पटेल को भाजपा विधानसभा के लिए टिकट दिया था। लेकिन वे चुनाव हार गए। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तीनों केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, कैलाश चौधरी, सांसद सीपी जोशी, दुष्यंत सिंह, पीपी चौधरी व सुमेधानन्द को पहली सूची में टिकट दिए जाने की तैयारी हैं। करीब 15 सीटों को फिलहाल पेंडिंग छोड़ दिया गया हैं।
SC-ST को सामान्य सीटों पर उतार सकती हैं कांग्रेस
कांग्रेस हिंदी पट्टी वाले राज्यों में लोकसभा चुनाव के (Rajasthan) लिए सामान्य सीटों पर भी दलित- आदिवासी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। सबसे अधिक सीटें पिछड़ी जातियों को देने पर भी विचार चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व कांग्रेस नेता राहुल गांधी के फोकस में पिछले कुछ समय से यही वर्ग है। इसे कांग्रेस की खोई जमीन तलाशने की कोशिश माना जा रहा है। खास तौर पर राम मंदिर लहर पैदा करने की भाजपा की कोशिश की काट इसमें खोजी जा रही है। करीब 40 से 60 फीसदी सीटों पर पिछड़ी जातियों के प्रत्याशी उतारे जा सकते है। स्क्रीनिंग कमेटियों को इस तरह के पैनल बनाने के निर्देश दिए गए है। नामों पर अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में होगा।
क्या है राजस्थान में प्रत्याशी चयन का फॉर्मुला
राजस्थान की कुल 25 सीटें है, जिनमें से 3 सीटें एसटी और चार सीटें एससी के लिए आरक्षित है। 2019 में कांग्रेस ने सामान्य वर्ग की दो सीटों पर आदिवासी नेताओं को चुनाव में उतारा। इसके अलावा सामान्य वर्ग की 18 में से करीब 8 से 12 सीटें पिछड़े वर्ग को मिलती रही है। वहीं सामान्य वर्ग को 8 से 10 सीटों पर मौका मिलता रहा है। कांग्रेस ने 2009, 2014 व 2019 में इसी तरह की सोशल इंजीनियरिंग के तहत टिकट बांटे थे।