Jaipur: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद अब राजस्थान के मुख्यमंत्री (Premchand Bairwa) के नाम की घोषणा कर दी गई है। भजन लाल शर्मा के हाथ प्रदेश की कमान सौंप दी गई है। मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर भाजपा विधायक दल की बैठक होने के बाद ये फैसला लिया गया। वहीं, दीया कुमारी और डॉक्टर प्रेम चंद बैरवा को राजस्थान का उपमुख्यमंत्री चुना गया है। ऐसे में सभी के मन में सवाल उठ रहें हैं कि आखिर प्रेमचन्द्र बैरवा कौन है जिन्हें राज्य के उपमुख्यमंत्री की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जानें कौन है प्रेमचन्द बैरवा?
आपको बता दें कि राजस्थान के होने वाले उप-मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा (Premchand Bairwa) एससी समाज से आते हैं। वे मौजमाबाद तहसील के श्रीनिवास पुरम के रहने वाले हैं और दलित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बैरवा ने विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर एससी सीट दूदू से चुनाव लड़ा और विधायक बन गए। बैरवा ने 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बाबूलाल नागर को 35,743 वोटों के अंतर से हराकर सीट जीती थी। इससे पहले, बैरवा ने 2013 में कांग्रेस उम्मीदवार हजारी लाल नागर को 33,720 वोटों के अंतर से हराकर दूदू निर्वाचन क्षेत्र जीता था। हालांकि, वह 2018 में दूदू निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार बाबू लाल नागर से 14,779 मतों के अंतर से हार गए थे। 54 साल के प्रेमचंद बैरवा शैक्षिक योग्यता में डॉक्टरेट हैं। पहले उनका पेशा खेती और व्यापार रहा है।ऐसा रहा प्रेमचन्द बैरवा का जीवन
बैरवा का शुरूआती जीवन संघर्षों में बीता हैं। वे साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता रामचन्द्र बैरवा साधारण किसान थे। हालांकि तीन भाईयों के बीच गांव में करीब 60 बीघा जमीन थी। लेकिन परिवार चलाने के लिए बैरवा ने पढ़ाई के साथ खुद के खेतों पर तो कभी साझेदरी में खेती की। फिर बेलदारी करने लगे। कपड़ों की सिलाई करते-करते कपड़े एक्सपोर्ट करने वाले बड़े व्यापारी बने, 3 से 4 साल तक एलआईसी एजेंट और बाद में प्रॉपर्टी डीलिंग के काम जुड़े रहे। प्रेमचंद की प्रष्ठभूमि संघ से जुड़ी रही।साधारण परिवार से राजनीति में आए
मौजमाबाद तहसील के ग्राम श्रीनिवासीपुरा के सामान्य दलित परिवार में जन्मे डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने अपनी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1995 से दूदू ब्लॉक संगठन में कार्य किया। वर्ष 2000 में पहला दूदू के वार्ड 15 से जिला परिषद सदस्य के तौर पर जीत दर्ज कर राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की। एससी मोर्चा जिलाध्यक्ष जयपुर ग्रामीण वर्ष 2008 में दूदू भाजपा मंडल महामंत्री, वर्ष 2013 में विधायक के लिए भाजपा ने दूदू एससी वर्ग की आरक्षित सीट पर टिकट दिया। प्रेमचंद बैरवा ने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस के हजारीलाल नागर को 33 हजार 720 वोट से पराजित किया। ABVP से की अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत- प्रेम चंद बैरवा ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से 1995 में की थी।
- 1995 में उन्होंने दूदू ब्लॉक संगठन में काम किया।
- बात करें शिक्षा की तो, प्रेम चंद एमफिल और पीएचडी हैं।
- विधायक के साथ-साथ वह पेट्रोल पंप के डीलर भी है।
- एससी मोर्चा में भाजपा के सह प्रभारी और बैरवा महासभा के अध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत हैं।