आषाढ़ अमावस्या को सनातन धर्म में स्नान, दान, तर्पण और पितृ पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए दान-पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा परिवार पर सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद बनाए रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि राशि के अनुसार दान किया जाए तो इसका विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है।
कब है आषाढ़ अमावस्या?
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026 को शाम 6:49 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3:12 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान का विशेष महत्व माना गया है।
राशि अनुसार करें ये दान
मेष: जल, गुड़ और गेहूं का दान करें।
वृषभ: धन और अन्न का दान शुभ रहेगा।
मिथुन: गन्ने का रस और ठंडा पानी दान करें।
कर्क: सफेद खाद्य पदार्थ और सामर्थ्य अनुसार धन का दान करें।
सिंह: गुड़, चना और शहद का दान लाभकारी माना गया है।
कन्या: घी से बने हरे रंग के खाद्य पदार्थों का दान करें।
तुला: ब्राह्मणों को भोजन कराएं और सफेद वस्तुओं का दान करें।
वृश्चिक: गुड़ और लाल वस्त्रों का दान शुभ रहेगा।
धनु: मिठाई, केला और पीले वस्त्र दान करें।
मकर: काली उड़द और तिल का दान करें।
कुंभ: धन के साथ जूते-चप्पल का दान करना शुभ माना गया है।
मीन: ठंडा जल और पीले रंग के खाद्य पदार्थों का दान करें।
क्या है धार्मिक मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पितृ दोष में कमी आती है और परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता और अन्नदान को भी विशेष पुण्यकारी माना गया है।