चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह पर्व आमतौर पर मार्च या अप्रैल में पड़ता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि मार्च महीने में शुरू हो रही है, इसलिए कई लोग इसे मार्च की नवरात्रि भी कह रहे हैं। होली के समापन के बाद आने वाला यह एक प्रमुख हिंदू पर्व है। नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत तीन शुभ योगों में हो रही है।
कब शुरू होगी चैत्र नवरात्रि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च, गुरुवार को सुबह 6:52 बजे से शुरू होगी और 20 मार्च, शुक्रवार को तड़के 4:52 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 19 मार्च से ही चैत्र नवरात्रि का आरंभ माना जाएगा। इसी दिन कलश स्थापना के साथ पहला व्रत रखा जाएगा।
इस बार बन रहे हैं तीन शुभ योग
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। ये तीनों योग अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-
19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला मुहूर्त सुबह और दूसरा दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में है।
- पहला मुहूर्त: सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक
- दूसरा मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:15 बजे से 6:26 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:29 बजे से 6:53 बजे तक
- सायं संध्या: शाम 6:32 बजे से 7:43 बजे तक
- अमृत काल: रात 11:32 बजे से 1:03 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 12:05 बजे से 12:52 बजे तक
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