भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और 24 अगस्त को सावन का चौथा तथा अंतिम सोमवार मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में सावन के सोमवार को भगवान शिव की आराधना, व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल, दूध और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। अंतिम सोमवार होने के कारण इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया जाएगा।
पुत्रदा एकादशी के पारण से जुड़ा विशेष संयोग
इस बार सावन के अंतिम सोमवार का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इसी दिन सावन पुत्रदा एकादशी व्रत के पारण का अवसर रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जबकि सोमवार भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है। ऐसे में एक ही दिन भगवान विष्णु और भगवान महादेव की उपासना का अवसर मिलना भक्तों के लिए विशेष धार्मिक संयोग माना जा रहा है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और व्रत के नियमों के अनुसार एकादशी के पारण के बाद भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं।
सुबह बनेगा प्रीति योग, शुभ कार्यों के लिए माना जाता है अनुकूल
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 24 अगस्त की सुबह प्रीति योग का प्रभाव रहेगा। बताया गया है कि यह योग सुबह 7 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष परंपरा में प्रीति योग को शुभ और सकारात्मक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और ईश्वर की आराधना करने को विशेष फलदायी मानने की परंपरा है। हालांकि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का महत्व केवल योग या मुहूर्त से नहीं, बल्कि श्रद्धा, नियम और व्यक्तिगत आस्था से भी जुड़ा होता है।
7 बजकर 4 मिनट के बाद आयुष्मान योग
प्रीति योग समाप्त होने के बाद सुबह 7 बजकर 4 मिनट से आयुष्मान योग शुरू होने की बात कही गई है, जो पूरे दिन रहने का उल्लेख है। ज्योतिषीय मान्यताओं में आयुष्मान योग को दीर्घायु, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है। सावन के अंतिम सोमवार के साथ इसका मेल होने के कारण शिवभक्त इस दिन स्वास्थ्य, परिवार की सुख-शांति और दीर्घायु की कामना के साथ भगवान शिव का पूजन कर सकते हैं। विशेष रूप से जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप को शिव आराधना की परंपरा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
कैलाश पर शिववास की धार्मिक मान्यता
सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत पर होने की धार्मिक मान्यता भी बताई जा रही है। सनातन परंपरा में कैलाश को भगवान शिव का परम धाम माना जाता है और इसी कारण शिववास से जुड़े मुहूर्त का धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि में भगवान शिव की आराधना और रुद्राभिषेक करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है। भक्त इस दिन शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पित करते हुए अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
हंसराज योग का भी बताया जा रहा है संयोग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन हंसराज योग बनने की भी बात कही जा रही है। इसके लिए गुरु अर्थात बृहस्पति के कर्क राशि में स्थित होने तथा चंद्रमा के धनु और सूर्य के सिंह राशि में रहने का उल्लेख किया गया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु की स्थिति को ज्ञान, समृद्धि और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण हंसराज योग को जीवन में उन्नति, प्रतिष्ठा और सकारात्मक परिणामों से संबंधित माना जाता है। हालांकि ज्योतिषीय योगों के प्रभाव की व्याख्या अलग-अलग परंपराओं और गणनाओं के आधार पर भिन्न हो सकती है।
अंतिम सोमवार पर कैसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक
सावन के अंतिम सोमवार को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का ध्यान कर पूजा शुरू की जा सकती है। शिवलिंग पर पहले स्वच्छ जल अर्पित करें और अपनी परंपरा के अनुसार दूध, दही, शहद या अन्य पूजन सामग्री का प्रयोग कर सकते हैं। इसके बाद बेलपत्र, पुष्प और अक्षत अर्पित करते हुए भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है और सामर्थ्य के अनुसार शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
श्रद्धा के साथ करें पूजा, आडंबर से बचें
धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को सरल और सहज आराधना से प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है। इसलिए पूजा में अत्यधिक खर्च या दिखावे के बजाय श्रद्धा और नियम का महत्व अधिक माना जाता है। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार जलाभिषेक और पूजन कर सकते हैं तथा जरूरतमंदों को भोजन या आवश्यक सामग्री का दान भी कर सकते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को यदि किसी कारण मंदिर जाना संभव न हो तो घर में स्थापित शिवलिंग या भगवान शिव के चित्र के सामने भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा से की गई आराधना ही इस पावन अवसर का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है।