कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का शानदार प्रदर्शन जारी है। महिला 69 किलोग्राम भार वर्ग में भारत की हरजिंदर कौर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 227 किलोग्राम का स्कोर बनाया। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने बर्मिंघम 2022 के कांस्य पदक को इस बार रजत पदक में बदल दिया।
350 रुपये से शुरू हुआ था सपनों का सफर
हरजिंदर कौर की सफलता के पीछे एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी छिपी है। पंजाब के नाभा की रहने वाली हरजिंदर जब कॉलेज हॉस्टल में प्रशिक्षण के लिए जाती थीं, तब उनके पिता आर्थिक तंगी के बावजूद उन्हें केवल 350 रुपये आने-जाने के किराए और 350 रुपये जेब खर्च के लिए दे पाते थे। परिवार की सीमित आय के कारण इससे अधिक पैसे देना संभव नहीं था, लेकिन पिता का भरोसा कभी कम नहीं हुआ। हरजिंदर ने भी उसी विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और लगातार मेहनत जारी रखी।
गरीबी, खेत और मेहनत ने बनाया चैंपियन
हरजिंदर का बचपन किसी बड़े शहर या आधुनिक खेल अकादमी में नहीं बीता। किसान परिवार से आने वाली हरजिंदर घर के कामों में हाथ बंटाती थीं। पशुओं के लिए चारा काटना, खेतों में मेहनत करना और कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि चारा काटने वाली मशीन चलाने से उनके हाथों और कंधों में जो ताकत आई, वही आगे चलकर वेटलिफ्टिंग में उनकी सबसे बड़ी पूंजी बनी।
रिकॉर्ड प्रदर्शन के बावजूद गोल्ड से चूकीं
ग्लासगो में हरजिंदर ने कई बार गेम्स रिकॉर्ड को चुनौती दी और अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। हालांकि कनाडा की शार्लोट सिमोनो ने 240 किलोग्राम कुल वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया की न्या फिबे हेमन को कांस्य पदक मिला, जबकि हरजिंदर ने रजत जीतकर भारत के पदकों की संख्या में महत्वपूर्ण इजाफा किया।
'ब्रॉन्ज को सिल्वर में बदला, अब गोल्ड जीतना है'
रजत पदक जीतने के बाद हरजिंदर ने कहा कि बर्मिंघम में कांस्य जीतने के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि अगली बार पदक का रंग बदलना है। उन्होंने अपना लक्ष्य पूरा किया, लेकिन अब उनकी नजर 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स पर है। उनका कहना है कि अगली बार वह भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने की पूरी कोशिश करेंगी। हरजिंदर ने अपनी इस उपलब्धि को अपने माता-पिता, परिवार, कोच, भारतीय वेटलिफ्टिंग महासंघ और देशवासियों को समर्पित किया।
संघर्ष से सफलता तक का संदेश
हरजिंदर कौर की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते। पिता का विश्वास, परिवार का त्याग और वर्षों की मेहनत ने एक साधारण किसान की बेटी को कॉमनवेल्थ खेलों के मंच पर भारत का गौरव बना दिया। उनकी यह उपलब्धि देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।