भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बुधवार को अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे संस्करण के उद्घाटन अवसर पर भारत के आने वाले अंतरिक्ष अभियानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने चंद्रमा, मंगल और शुक्र से जुड़े कई प्रस्तावित मिशनों का उल्लेख किया और बताया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वाकांक्षी तथा उन्नत तकनीक से लैस होने जा रहा है।
चंद्रयान-4 का लक्ष्य: चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाना
अध्यक्ष वी. नारायणन के अनुसार भारत चंद्रयान-4 मिशन के माध्यम से चंद्रमा की सतह से वैज्ञानिक नमूने एकत्र कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने की योजना बना रहा है। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि साबित हो सकता है, क्योंकि इससे चंद्रमा की सतह, उसके खनिजों और भूवैज्ञानिक संरचना के बारे में विस्तृत अध्ययन संभव होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे नमूनों का विश्लेषण चंद्रमा के निर्माण और उसके विकास से जुड़े कई रहस्यों को उजागर कर सकता है।
चंद्रयान-5 में भारी लैंडर और शक्तिशाली रोवर
आने वाले चंद्रयान-5 मिशन को भी अत्यंत उन्नत तकनीक के साथ तैयार करने की योजना है। इस मिशन में अपेक्षाकृत भारी लैंडर भेजा जाएगा, जिसकी संचालन अवधि भी अधिक लंबी होगी। इसके साथ ही इस मिशन में लगभग 350 किलोग्राम वज़न वाला शक्तिशाली रोवर भेजने की योजना है। तुलना करें तो चंद्रयान-3 में केवल लगभग 25 किलोग्राम का रोवर भेजा गया था। भविष्य के मिशनों में रोवर की कार्यक्षमता और संचालन अवधि को भी लगभग 100 दिनों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
मंगल और शुक्र से जुड़े मिशनों पर भी काम
चंद्रमा के अतिरिक्त भारत मंगल और शुक्र ग्रह से जुड़े अभियानों पर भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन पहले ही मंगल की कक्षा में सफल मिशन पूरा कर चुका है और अब मंगल ग्रह पर उतरने वाले मिशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही शुक्र ग्रह की कक्षा में उपग्रह भेजने की योजना पर भी काम चल रहा है। इन परियोजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।
गगनयान कार्यक्रम से मानव अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी
भारत का गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। इसके लिए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम कई महत्वपूर्ण तकनीकों पर काम कर रही है, ताकि भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता हासिल करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो सके।
2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन
वी. नारायणन ने यह भी बताया कि भारत वर्ष 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है। यह अंतरिक्ष स्टेशन वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी प्रयोगों और अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मानव उपस्थिति के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा। इसके साथ ही भारत का लक्ष्य वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना और उन्हें सुरक्षित वापस पृथ्वी पर लाना है।
Comments (0)