सरकारी सेवाओं को एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने की कोशिश अब बड़े पैमाने पर नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, यूनिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस यानी UMANG पर पिछले तीन वर्षों में 11.66 करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया है। इसी अवधि में मंच पर लगभग 798 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि सरकारी सेवाओं के लिए मोबाइल आधारित डिजिटल माध्यमों पर नागरिकों की निर्भरता लगातार बढ़ रही है।
जुलाई 2026 तक 2,575 सरकारी सेवाएं उपलब्ध
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 7 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दी गई जानकारी में डिजिटल सरकारी सेवाओं के विस्तार से जुड़े आंकड़े साझा किए। मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक UMANG पर करीब 2,575 सेवाएं सक्रिय थीं। इनमें केंद्र सरकार की 880 सेवाएं और राज्य सरकारों की 1,695 सेवाएं शामिल थीं। एक ही मंच पर विभिन्न विभागों की सेवाओं का उपलब्ध होना नागरिकों के लिए अलग-अलग सरकारी वेबसाइट और आवेदन प्रणालियों के बीच भटकने की जरूरत को कम कर सकता है।
DigiLocker ने भी बनाई बड़ी डिजिटल पहुंच
सरकारी डिजिटल सेवाओं के विस्तार में UMANG के साथ DigiLocker की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, DigiLocker पर 5,437 तरह के दस्तावेज और सेवाएं उपलब्ध थीं। इनमें केंद्र सरकार से जुड़ी 661 और राज्य सरकारों से संबंधित 4,776 सेवाएं शामिल थीं। पिछले तीन वर्षों में DigiLocker पर 72.43 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया, जबकि लगभग 72.86 करोड़ दस्तावेज पहुंच लेनदेन दर्ज किए गए। डिजिटल दस्तावेजों की बढ़ती स्वीकार्यता सरकारी और निजी दोनों तरह की सेवाओं में कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।
गांवों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने में सीएससी की बड़ी भूमिका
डिजिटल सेवाओं का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, इसके लिए सरकार ने कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी के नेटवर्क को भी व्यापक बनाया है। ये केंद्र ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में नागरिकों को सरकारी सेवाओं के अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा, पेंशन और उपयोगिता बिल भुगतान जैसी सुविधाओं तक डिजिटल पहुंच प्रदान करते हैं। 30 जून 2026 तक देशभर में ग्राम पंचायत स्तर पर 4,07,122 कॉमन सर्विस सेंटर संचालित हो रहे थे। यह नेटवर्क उन नागरिकों के लिए खास महत्व रखता है, जिनके पास व्यक्तिगत स्तर पर डिजिटल संसाधनों या ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करने की पर्याप्त सुविधा नहीं है।
महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी
कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 4,07,122 ग्राम पंचायत स्तर के केंद्रों में से 70,069 केंद्र महिला विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर चला रही थीं। इसका महत्व केवल डिजिटल सेवा वितरण तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को डिजिटल उद्यमिता से जोड़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और सेवा उपलब्धता दोनों को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसे केंद्र ग्रामीण नागरिकों और डिजिटल सरकारी व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु के रूप में काम कर रहे हैं।
मोबाइल से कहीं भी मिल रही सरकारी सेवाओं की सुविधा
सरकार का डिजिटल सेवा मॉडल अब केवल कंप्यूटर या सरकारी कार्यालय तक सीमित नहीं है। मोबाइल एप्लीकेशन और वेब पोर्टल के माध्यम से नागरिक कई सेवाओं का उपयोग अपने घर या कार्यस्थल से कर सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार, ग्रामीण और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए मोबाइल तथा वेब आधारित पहुंच को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों को समय और स्थान की बाधाओं से मुक्त करते हुए सरकारी सेवाओं तक अधिक आसान पहुंच देना है।
आधार, ई-साइन और एपीआई सेतु से मजबूत हो रहा डिजिटल ढांचा
इन डिजिटल मंचों की कार्यक्षमता के पीछे भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकारी सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और कागजरहित बनाने के लिए आधार, ई-साइन और एपीआई सेतु जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के साथ इन प्लेटफॉर्म का एकीकरण किया जा रहा है। इससे पहचान सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और विभिन्न डिजिटल प्रणालियों के बीच सेवा एकीकरण जैसे काम अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जा सकते हैं। इसका व्यापक लक्ष्य ऐसी सरकारी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें नागरिक को सेवा प्राप्त करने के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने या अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो।
डिजिटल इंडिया के अगले चरण की तस्वीर
UMANG, DigiLocker और कॉमन सर्विस सेंटर के आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि भारत में सरकारी सेवा वितरण तेजी से डिजिटल हो रहा है। हालांकि, डिजिटल पहुंच बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, डिजिटल साक्षरता और दूर-दराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की विश्वसनीय उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण बनी रहेंगी। डिजिटल शासन की वास्तविक सफलता केवल पंजीकृत उपयोगकर्ताओं और लेनदेन की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि सेवाएं कितनी सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और सभी नागरिकों के लिए समान रूप से सुलभ बन पाती हैं। यदि तकनीक और स्थानीय स्तर की सेवा व्यवस्था साथ-साथ मजबूत होती है, तो डिजिटल शासन भारत में सरकारी सेवाओं के अनुभव को लंबे समय के लिए बदल सकता है।