सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से बनाया गया एक अकाउंट अचानक चर्चा में आ गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अकाउंट ने करीब 24 घंटे के भीतर 1.7 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए। अकाउंट पर दर्ज विवरण के अनुसार इसे इसी महीने बनाया गया था और इसका उपयोगकर्ता नाम एक बार बदला भी गया है। तेजी से बढ़ती फॉलोअर्स संख्या के कारण यह अकाउंट सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
अकाउंट पर दर्ज हैं दर्जनों पोस्ट
इंस्टाग्राम पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम वाले इस अकाउंट से अब तक करीब 63 पोस्ट किए जा चुके हैं। अकाउंट लगभग 35 अन्य प्रोफाइल को फॉलो करता है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रोफाइल जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि इसे कौन संचालित कर रहा है या इसके पीछे कौन से व्यक्ति अथवा समूह हैं। इसलिए अकाउंट के नाम या उसके फॉलोअर्स की संख्या के आधार पर इसके संचालन से जुड़े किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द के बाद बढ़ी चर्चा
इस अकाउंट की चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में नक्सलवाद के मुद्दे पर टिप्पणी की थी। उन्होंने सशस्त्र नक्सलवाद के साथ-साथ ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने वाले लोगों से भी सतर्क रहने की बात कही थी। प्रधानमंत्री के भाषण के बाद सोशल मीडिया पर इस शब्द को लेकर बहस शुरू हुई और इसी नाम से कई अकाउंट दिखाई देने लगे।
पीएम मोदी ने भाषण में क्या कहा था
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद ऐसे तत्व मौजूद हैं जो अलग तरीके से देश को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए ऐसे लोगों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही, जिन्हें वह हिंसा और देश को गलत दिशा में ले जाने वाली विचारधारा से जोड़ते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों स्तरों पर ‘दिमागी नक्सल’ शब्द चर्चा का विषय बन गया।
किरेन रिजिजू ने भी दी शब्द की व्याख्या
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द की अपनी व्याख्या पेश की। उन्होंने इसे उन लोगों से जोड़ा जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को स्वीकार नहीं करते। रिजिजू ने अलगाववादी गतिविधियों के समर्थन, जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ कथित गतिविधियों का भी उल्लेख किया। हालांकि, ‘दिमागी नक्सल’ कोई औपचारिक कानूनी या संवैधानिक श्रेणी नहीं है, इसलिए राजनीतिक बयानों में इस्तेमाल किए गए इस शब्द को उसी संदर्भ में समझना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर नाम को लेकर नया विवाद
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से अकाउंट का तेजी से लोकप्रिय होना सोशल मीडिया की उस प्रवृत्ति को भी दिखाता है, जिसमें राजनीतिक भाषणों और चर्चित शब्दों को तुरंत डिजिटल पहचान में बदला जाता है। इससे पहले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी नाम से बने सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर भी चर्चा हुई थी। नए अकाउंट के मामले में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इसके पीछे कोई वास्तविक राजनीतिक संगठन है, व्यंग्यात्मक पहल है या किसी व्यक्ति अथवा समूह की डिजिटल गतिविधि। इसलिए इसके फॉलोअर्स की संख्या को किसी औपचारिक राजनीतिक समर्थन का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।