नई दिल्ली. लगातार कई सप्ताह तक धीमी रफ्तार से आगे बढ़ने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अब एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। नवीनतम उपग्रह चित्रों में उत्तरी बंगाल की खाड़ी से लेकर जम्मू-कश्मीर तक लगभग 1,500 किलोमीटर लंबी मानसूनी द्रोणिका स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार यह द्रोणिका मानसून की सक्रियता का सबसे महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। वर्तमान में इसका झुकाव हिमालय की तराई की ओर है, लेकिन जैसे-जैसे यह अपने सामान्य स्थान की ओर दक्षिण की दिशा में खिसकेगी, उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां तेज होने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे लंबे समय से वर्षा का इंतजार कर रहे करोड़ों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
क्या होती है मानसूनी द्रोणिका और क्यों होती है इतनी महत्वपूर्ण
मानसूनी द्रोणिका वास्तव में निम्न वायुदाब का एक विस्तृत क्षेत्र होता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी प्रणाली की रीढ़ माना जाता है। यही प्रणाली अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी से भरपूर हवाओं को देश के भीतरी हिस्सों तक पहुंचाती है। जब यह द्रोणिका सामान्य स्थिति में रहती है तो मध्य और उत्तर भारत में व्यापक वर्षा होती है, जबकि इसके अत्यधिक उत्तर की ओर खिसकने पर अधिकांश बारिश हिमालय की तलहटी तक सीमित रह जाती है। यही कारण है कि इस वर्ष जून के अधिकांश दिनों में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में भीषण गर्मी तथा वर्षा की कमी बनी रही।
उत्तर भारत में जल्द बदल सकता है मौसम का मिजाज
मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी एक से चार जुलाई के बीच मानसूनी गतिविधियां तेजी से सक्रिय होंगी। द्रोणिका के दक्षिण की ओर आने के साथ ही गरज-चमक वाले बादलों का विकास होगा और कई स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लंबे समय से बनी उमस और लू जैसी परिस्थितियों से राहत मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान प्रणाली अपेक्षित रूप से सक्रिय रही तो उत्तर भारत में मानसून की प्रगति तेज होगी और वर्षा का दायरा लगातार विस्तृत होता जाएगा।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया निम्न दबाव देगा अतिरिक्त ताकत
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार केवल मानसूनी द्रोणिका ही नहीं, बल्कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया निम्न वायुदाब क्षेत्र भी आगामी दिनों में मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करेगा। यह प्रणाली समुद्र से अधिक मात्रा में नमी लेकर उत्तर और मध्य भारत की ओर बढ़ेगी, जिससे वर्षा की तीव्रता और विस्तार दोनों में वृद्धि होने की संभावना है। इस संयुक्त प्रभाव से अनेक राज्यों में व्यापक वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। कृषि विशेषज्ञ भी इसे खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, क्योंकि समय पर होने वाली वर्षा खेती और जल संसाधनों दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भीषण गर्मी के बाद राहत की उम्मीद, लेकिन सतर्कता भी जरूरी
जून के अंतिम सप्ताह तक दिल्ली सहित उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा, जबकि हवा में अत्यधिक नमी के कारण उमस ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी। कई स्थानों पर रात का तापमान भी सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। अब मानसून के सक्रिय होने से तापमान में गिरावट और मौसम में राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मानसून के सक्रिय चरण में अचानक तेज वर्षा, आकाशीय बिजली, जलभराव और तेज हवाओं जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन और आम नागरिकों दोनों को मौसम संबंधी ताजा चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी।