तिनसुकिया. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसने लाखों लोगों को भावुक कर दिया है। असम के तिनसुकिया निवासी 17 वर्षीय ऋषभ दत्ता अपने जीवन के अंतिम क्षणों में अस्पताल के बिस्तर पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथ में गिटार है और आसपास डॉक्टरों व नर्सों की टीम मौजूद है। इस दौरान ऋषभ बेहद मधुर और शांत आवाज में हिंदी सिनेमा का अमर गीत ‘लग जा गले’ गा रहे हैं। वीडियो में उनके चेहरे पर भय नहीं बल्कि अद्भुत शांति और आत्मविश्वास दिखाई देता है। यही दृश्य लोगों के दिलों को गहराई से छू रहा है।
जिंदगी की आखिरी घड़ियों में भी नहीं छोड़ा संगीत का साथ
जिस उम्र में बच्चे अपने भविष्य के सपने देखते हैं, उस उम्र में ऋषभ जीवन और मृत्यु के संघर्ष से गुजर रहे थे। लेकिन सबसे भावुक बात यह रही कि उन्होंने अपने अंतिम समय को भी निराशा या भय में नहीं बिताया। उन्होंने संगीत को अपना सहारा बनाया और अपनी आवाज के जरिए जैसे जीवन को आखिरी बार महसूस किया। वीडियो देखने वाले लोग यह कह रहे हैं कि ऋषभ ने केवल एक गीत नहीं गाया, बल्कि उन्होंने दुनिया को साहस, स्वीकार्यता और जीवन के प्रति प्रेम का संदेश दिया।
दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे थे ऋषभ दत्ता
जानकारी के अनुसार ऋषभ लंबे समय से ‘एप्लास्टिक एनीमिया’ नाम की गंभीर और दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे। इस बीमारी में शरीर नई रक्त कोशिकाएं बनाना लगभग बंद कर देता है, जिससे मरीज की स्थिति लगातार कमजोर होती चली जाती है। डॉक्टरों की निगरानी और परिवार के अथक प्रयासों के बावजूद ऋषभ की हालत में स्थायी सुधार नहीं हो सका। उनके माता-पिता ने बेटे को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन अंततः 17 वर्ष की छोटी सी उम्र में ऋषभ ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
सोशल मीडिया पर उमड़ा भावनाओं का सैलाब
ऋषभ का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। हजारों लोग उनकी बहादुरी, मुस्कान और संगीत के प्रति प्रेम को सलाम कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि जीवन का सबसे बड़ा साहस शायद यही है कि इंसान कठिनतम क्षणों में भी मुस्कुराना न छोड़े। कुछ लोगों ने ऋषभ को “सच्चा योद्धा” बताया, तो कई ने कहा कि उनका गीत लंबे समय तक लोगों के दिलों में गूंजता रहेगा।
‘लग जा गले’ गीत बना आखिरी भावनात्मक संदेश
लता मंगेशकर द्वारा अमर बनाए गए गीत ‘लग जा गले’ को ऋषभ ने जिस भाव और शांति के साथ गाया, उसने इस गीत को और अधिक मार्मिक बना दिया। गीत के शब्द मानो उनके अंतिम भावों को व्यक्त कर रहे थे। वीडियो में मौजूद डॉक्टर और नर्सें भी भावुक दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य केवल एक मरीज का नहीं, बल्कि जीवन को अंतिम क्षण तक पूरी गरिमा और संवेदना के साथ जीने वाले एक साहसी किशोर का प्रतीक बन गया है।
ऋषभ की कहानी ने जीवन को देखने का नजरिया बदला
ऋषभ दत्ता की कहानी ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जीवन केवल उसकी लंबाई से नहीं, बल्कि उसे जीने के तरीके से बड़ा बनता है। इतनी कम उम्र में भी जिस धैर्य, संवेदनशीलता और साहस के साथ उन्होंने अपनी अंतिम यात्रा का सामना किया, उसने अनगिनत लोगों को भीतर तक प्रभावित किया है। उनका यह वीडियो अब केवल एक वायरल क्लिप नहीं, बल्कि जीवन, मृत्यु और मानवीय साहस की एक भावनात्मक मिसाल बन चुका है।