लखनऊ में राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने हाथी दांत की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 54 कलाकृतियां बरामद की हैं। मामले में चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। DRI के मुताबिक बरामद सभी वस्तुएं हाथी दांत से तैयार की गई हैं और इनकी व्यावसायिक एवं एंटीक वैल्यू करोड़ों रुपये तक होने की संभावना है।
कार्रवाई के बाद बरामद कलाकृतियों को वन विभाग को सौंप दिया गया है। अब वन विभाग इस मामले में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।
54 कलाकृतियों में बारीक नक्काशी
DRI के अनुसार बरामद हाथी दांत की कलाकृतियों में जानवरों की आकृतियां, मानव मूर्तियां और कई तरह की सजावटी एवं अलंकरण संबंधी वस्तुएं शामिल हैं।इन कलाकृतियों पर बेहद बारीकी से नक्काशी की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इनके बाजार मूल्य के साथ-साथ एंटीक वैल्यू भी काफी अधिक हो सकती है, जिसके चलते इनकी कुल कीमत करोड़ों रुपये तक होने का अनुमान है।
खुफिया जानकारी के बाद DRI ने की कार्रवाई
DRI को हाथी दांत से बनी कलाकृतियों के अवैध व्यापार के संबंध में खुफिया जानकारी मिली थी। इनपुट के आधार पर अधिकारियों ने निगरानी और जांच शुरू की।इसके बाद 19 अगस्त को लखनऊ में कार्रवाई करते हुए चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से हाथी दांत से बनी 54 कलाकृतियां बरामद की गईं।
हाथी दांत के कारोबार पर कानूनन प्रतिबंध
भारत में हाथी दांत और उससे बनी वस्तुओं के व्यापार एवं वाणिज्य पर कानूनी प्रतिबंध है। यह प्रतिबंध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत लागू है।हाथी दांत की तस्करी को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से गंभीर अपराध माना जाता है।
CITES के तहत भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियंत्रित
भारत की अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण प्रतिबद्धताओं में CITES यानी Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora भी शामिल है।
CITES के तहत लुप्तप्राय वन्यजीवों और उनसे जुड़े उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित किया जाता है। हाथी दांत से जुड़े अवैध कारोबार पर कार्रवाई इसी व्यापक संरक्षण व्यवस्था का हिस्सा है।
बरामद सामान वन विभाग को सौंपा गया
DRI की कार्रवाई के बाद बरामद सभी हाथी दांत की कलाकृतियों को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। वन विभाग अब बरामद सामग्री की आगे जांच और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगा।DRI की इस कार्रवाई को वन्यजीवों से जुड़े अवैध कारोबार के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।