अयोध्या- अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। ट्रस्ट पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति करेगा, जिसे मंदिर के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर के संचालन को अधिक पारदर्शी, पेशेवर और जवाबदेह बनाना है।
22 जुलाई को हो सकता है नाम का ऐलान
ट्रस्ट की 22 जुलाई को प्रस्तावित बैठक में पहले CEO के नाम की घोषणा की जा सकती है। इसके लिए पहले ही तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया जा चुका है, जो योग्य उम्मीदवार का चयन करेगी।
2500 कर्मचारियों की जिम्मेदारी संभालेंगे CEO
नियुक्त होने वाले CEO मंदिर से जुड़े करीब 2500 कर्मचारियों के कामकाज की निगरानी करेंगे। इसके अलावा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, प्रशासनिक फैसलों का क्रियान्वयन और ट्रस्ट के दैनिक संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास होगी।
चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन पर रहेगी नजर
CEO की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे का पारदर्शी प्रबंधन शामिल होगा। इसके लिए आधुनिक अकाउंटिंग सिस्टम लागू किया जाएगा और चार्टर्ड अकाउंटेंट तथा वित्तीय विशेषज्ञों की मदद से पूरे वित्तीय लेनदेन की निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना न रहे।
श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन पर रहेगा फोकस
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। ऐसे में CEO जिला प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय बनाकर दर्शन व्यवस्था, प्रवेश-निकास, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाएंगे।
निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा भी होगी जिम्मेदारी
मंदिर परिसर में चल रहे शेष निर्माण कार्यों, भवनों के रखरखाव, CCTV नेटवर्क, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं की निगरानी भी CEO के अधिकार क्षेत्र में होगी। ट्रस्ट द्वारा लिए गए सभी प्रशासनिक निर्णयों को जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास रहेगी।
प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव
ट्रस्ट का मानना है कि CEO पद के सृजन से राम मंदिर का संचालन अधिक व्यवस्थित होगा। इससे ट्रस्ट, राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।