सहारनपुर। देश में आम को फलों का राजा कहा जाता है और गर्मियों का मौसम आते ही इसकी मांग चरम पर पहुंच जाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक किसान ने आम उत्पादन की पारंपरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए ऐसी किस्म विकसित की है, जो वर्ष के बारहों महीने फल देती है। इस अनूठी उपलब्धि ने न केवल कृषि विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि आम उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच भी उत्सुकता पैदा कर दी है। आमतौर पर मौसमी फल माने जाने वाले आम का पूरे वर्ष उपलब्ध होना कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
चार दशकों की मेहनत से मिला असाधारण परिणाम
सहारनपुर के दिल्ली मार्ग स्थित प्रकृति कुंज में रहने वाले प्रगतिशील किसान राजेंद्र अटल पिछले लगभग चालीस वर्षों से दुर्लभ और विशेष पौधों के संरक्षण तथा विकास का कार्य कर रहे हैं। उनके बगीचे में सेब, अखरोट, मालटा और चंदन जैसे कई विशेष वृक्ष मौजूद हैं। लंबे अनुसंधान, प्रयोग और बागवानी तकनीकों के उपयोग के बाद उन्होंने आम की एक ऐसी किस्म को पुनर्जीवित किया है, जो वर्षभर फल देने की क्षमता रखती है। उनकी इस उपलब्धि को स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि कृषि जगत में भी एक प्रेरणादायक प्रयोग माना जा रहा है।
‘सदाबहार’ नाम के पीछे छिपी है खास कहानी
इस अनूठे आम के पेड़ को किसान ने ‘सदाबहार वैरायटी’ नाम दिया है। इसका कारण यह है कि इस पेड़ पर किसी भी समय फल उत्पादन की पूरी प्रक्रिया एक साथ दिखाई देती है। एक ओर जहां नई मंजरी और बौर निकलते हैं, वहीं दूसरी ओर कच्चे फल विकसित हो रहे होते हैं और साथ ही पके हुए आम भी शाखाओं पर लटकते नजर आते हैं। यही विशेषता इसे पारंपरिक आम की किस्मों से पूरी तरह अलग बनाती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की निरंतर फलन क्षमता भविष्य में फल उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
ग्राफ्टिंग तकनीक और विशेष देखभाल का परिणाम
राजेंद्र अटल के अनुसार यह उपलब्धि केवल संयोग नहीं बल्कि वर्षों की वैज्ञानिक समझ और विशेष ग्राफ्टिंग तकनीक का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पेड़ पर एक खेप के फल पकने लगते हैं तो दूसरी खेप का विकास भी समानांतर रूप से शुरू हो जाता है। इसी क्रम के कारण पेड़ कभी भी पूरी तरह फलविहीन नहीं होता। विशेष पोषण, संतुलित सिंचाई और नियमित देखभाल के जरिए इस पेड़ की उत्पादकता को बनाए रखा जाता है। यही वजह है कि यह पेड़ वर्षभर फल देने में सक्षम बन पाया है।
छोटे आकार में छिपी है बड़ी क्षमता
जहां सामान्य रूप से आम के पेड़ काफी ऊंचे और विशाल होते हैं, वहीं यह विशेष पेड़ केवल छह से आठ फीट की ऊंचाई तक सीमित है। इसके बावजूद इसकी फल उत्पादन क्षमता आश्चर्यजनक है। छोटे आकार के कारण इसकी देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान हो जाती है। पेड़ पर लगने वाले फल आकार, स्वाद और मिठास में किसी भी लोकप्रिय किस्म से कम नहीं हैं। पकने के बाद इनका रंग सुनहरा पीला हो जाता है और इनमें भरपूर रस होता है। फल इतने आकर्षक और स्वादिष्ट होते हैं कि इन्हें पक्षियों और गिलहरियों से बचाने के लिए विशेष सुरक्षा थैले लगाने पड़ते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने का बन सकता है नया माध्यम
यदि इस किस्म का व्यावसायिक स्तर पर विस्तार किया जाता है तो यह किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है। सामान्य किस्मों में जहां आम का उत्पादन केवल सीमित मौसम तक रहता है, वहीं इस किस्म से पूरे वर्ष बाजार में आपूर्ति संभव हो सकती है। इससे किसानों को विभिन्न मौसमों में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। वर्षभर उपलब्धता के कारण निर्यात बाजारों में भी इसकी मांग बढ़ सकती है, जिससे बागवानी क्षेत्र को नई मजबूती मिल सकती है।
आम प्रेमियों के लिए हर मौसम में खुशखबरी
यह अनूठी किस्म केवल किसानों के लिए ही नहीं बल्कि आम प्रेमियों के लिए भी किसी उपहार से कम नहीं है। सामान्यतः लोगों को आम का स्वाद लेने के लिए गर्मियों का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस किस्म के बड़े पैमाने पर विकसित होने पर वर्ष के किसी भी महीने ताजे आम उपलब्ध हो सकते हैं। बदलती कृषि तकनीकों और नवाचारों के दौर में यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय किसान अपनी मेहनत और प्रयोगधर्मिता से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं।