उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मनुस्मृति से जुड़े कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रायबरेली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर राहुल गांधी भारत की वर्तमान पीढ़ी के भविष्य के साथ क्यों खिलवाड़ करना चाहते हैं। योगी ने कहा कि देश को राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से कोई अपेक्षा नहीं है, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के संवैधानिक पद पर होने के कारण उनसे जिम्मेदार और सकारात्मक भूमिका की उम्मीद जरूर की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी जिम्मेदारियों से अलग हो रहे हैं और देश की परंपरा तथा विरासत को लेकर उनकी टिप्पणियां समाज में भ्रम पैदा करती हैं।
‘भारत की विरासत को बर्बाद क्यों करना चाहते हैं’
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की विरासत को समझे बिना उसके बारे में टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर भारत की परंपराओं और मूल्यों को लेकर इतनी नकारात्मकता क्यों दिखाई जा रही है और देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश क्यों की जा रही है। योगी ने कहा कि एक जिम्मेदार नेता प्रतिपक्ष से देश सकारात्मक भूमिका की अपेक्षा करता है, लेकिन उनके अनुसार राहुल गांधी ने उस भूमिका को निभाने के बजाय राजनीतिक विवादों को बढ़ावा दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत की मूल परंपराओं को कमजोर करने और समाज को भ्रमित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
‘पूर्वजों को भूलने वाले समाज का भविष्य नहीं’
योगी आदित्यनाथ ने भारतीय परंपरा और पूर्वजों के योगदान को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने पूर्वजों को भूल जाता है, उसका कोई भविष्य नहीं होता। मुख्यमंत्री के अनुसार भारत की परंपरा, संस्कृति और मूल्यों को विस्मृत करने की कोशिश लंबे समय में समाज के लिए नुकसानदायक हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत की विरासत को लेकर भ्रम फैलाकर देश के खिलाफ षड्यंत्र जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं। योगी ने कहा कि यह देखकर उन्हें आश्चर्य होता है कि संविधान की शपथ लेने वाले लोग ही कई बार भारत की परंपरा और विरासत पर सवाल खड़े करते दिखाई देते हैं।
अथर्ववेद और मत्स्य पुराण का दिया संदर्भ
मनु और भारतीय परंपरा को समझने के संदर्भ में योगी आदित्यनाथ ने अथर्ववेद और मत्स्य पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करने की बात कही। उनका तर्क था कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं को किसी एक राजनीतिक या वैचारिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता की जटिलता और उसके विकास को समझने के लिए मूल धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्रोतों का अध्ययन जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने मनु को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय प्राचीन ग्रंथों और भारतीय परंपरा का अध्ययन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके इस बयान के बाद मनुस्मृति को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और अधिक तेज होने के संकेत हैं।
अमेठी-रायबरेली की राजनीति पर भी हमला
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में गांधी परिवार और अमेठी-रायबरेली की राजनीति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अमेठी और रायबरेली लंबे समय तक एक राजनीतिक परिवार का साथ देते रहे, लेकिन उनके अनुसार इस क्षेत्र के सामने हमेशा पहचान का संकट खड़ा किया गया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के संस्थानों और स्मारकों के नाम एक ही परिवार से जोड़ने पर जोर दिया गया, जबकि स्थानीय इतिहास और वीरता के प्रतीकों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने राना बेनी माधव बख्श सिंह और वीरा पासी जैसे स्थानीय ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नाम पर संस्थानों या स्मारकों के बारे में पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
‘संविधान की शपथ लेकर विरासत को कोसना उचित नहीं’
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ा है। उनके अनुसार इस पद पर रहते हुए देश की एकता, परंपरा और विरासत को लेकर अधिक जिम्मेदारी के साथ बात की जानी चाहिए। योगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश से बाहर जाकर प्रदेश की आलोचना करते हैं और देश से बाहर भारत की आलोचना करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन भारत की सभ्यता, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बना रहना चाहिए। मनुस्मृति पर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके जरिए भारतीय इतिहास, सामाजिक व्यवस्था और राजनीतिक विचारधाराओं को लेकर व्यापक बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है।