चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल में मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया। घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, SDRF, NDRF और अन्य एजेंसियों से रेस्क्यू की प्रगति की जानकारी लेकर बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में कई श्रमिकों की मौत हुई है, जबकि कुछ घायल और कुछ अभी भी लापता बताए जा रहे हैं; अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े अपडेट होते रहे हैं।
टनल में अचानक घुसा पानी और मलबा
हादसा गुरुवार शाम पीपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन टीएचडीसी टनल में हुआ। अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और पत्थर टनल के भीतर पहुंच गए, जिससे वहां काम कर रहे श्रमिकों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया। घटनास्थल पर राहत और बचाव एजेंसियों को तुरंत लगाया गया और टनल के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए अभियान शुरू किया गया। THDC के मुताबिक विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर स्थित 4x111 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना है। परियोजना में 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल और करीब 3.07 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल का निर्माण शामिल है।
CM धामी ने मौके पर पहुंचकर लिया रेस्क्यू का जायजा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर बचाव अभियान की स्थिति जानी। उन्होंने अधिकारियों से टनल के अंदर की परिस्थितियों, फंसे श्रमिकों और रेस्क्यू के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीनरी के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित एजेंसियों को पूरी क्षमता के साथ अभियान चलाने और श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। धामी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती घायल श्रमिकों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। उन्होंने संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी वहां मौजूद श्रमिकों की स्थिति की जानकारी देने की बात कही है। गंभीर रूप से घायल लोगों को जरूरत पड़ने पर बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के इंतजाम भी तैयार रखे गए हैं।
बचकर निकले श्रमिकों ने सुनाई हादसे की भयावह कहानी
टनल से सुरक्षित बाहर निकले कुछ श्रमिकों ने बताया कि हादसे के समय अचानक तेज आवाज सुनाई दी और कुछ ही पलों में मलबा व पानी तेजी से अंदर आने लगा। एक घायल श्रमिक के मुताबिक कई लोग उस समय टनल के अंदर काम कर रहे थे और मलबे के तेज दबाव से कुछ लोग गिर पड़े, जबकि कई श्रमिक मलबे में फंस गए। घायलों ने यह भी बताया कि टनल के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने से सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। कुछ श्रमिकों को मलबे और पानी के बीच से बाहर निकलने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। घटना के बाद अस्पताल पहुंचाए गए श्रमिकों का इलाज किया जा रहा है।
NDRF, SDRF समेत कई एजेंसियां रेस्क्यू में जुटीं
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन के साथ SDRF, NDRF, पुलिस और अन्य बचाव दलों को अभियान में लगाया गया। भारी मलबे को हटाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। टनल के भीतर पानी और मलबे की स्थिति को देखते हुए बचाव दल बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहा है। अधिकारियों का फोकस पहले उन श्रमिकों तक पहुंचने पर है, जिनके टनल के अंदर फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और स्थिति के अनुसार अतिरिक्त संसाधन भी लगाए जा रहे हैं।
पहले से दिख रहे थे मिट्टी खिसकने के संकेत?
हादसे से बचकर निकले एक श्रमिक ने दावा किया कि जिस हिस्से में भूस्खलन हुआ, वहां पहले भी मिट्टी खिसकने जैसी स्थिति देखी गई थी। श्रमिकों के मुताबिक टनल के अंदर अचानक हुए घटनाक्रम ने उन्हें संभलने का ज्यादा मौका नहीं दिया। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और टनल के उस हिस्से में मलबा-पानी आने का सटीक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल प्राथमिकता फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की है।
रेस्क्यू के साथ घायलों के इलाज पर भी फोकस
प्रशासन ने अस्पतालों को भी अलर्ट रखा है। घायल श्रमिकों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और गंभीर स्थिति वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्रों तक ले जाने की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने भी घायल श्रमिकों से मिलने और उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने की बात कही है।