लोहाघाट : चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक में नेपाल सीमा से सटे सुल्ला और पासम गांव की छात्राओं को लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या से राहत मिल गई है। अब छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। जिलाधिकारी के निर्देश पर विद्या वाहिनी योजना के तहत छात्राओं के लिए दो स्कूल वाहनों की व्यवस्था की गई है।
सुल्ला और पासम गांव की छात्राएं लंबे समय से शिक्षा ग्रहण करने के लिए पैदल ही जीआईसी रोसाल पहुंचती थीं। लंबी दूरी और दुर्गम रास्तों के कारण उन्हें रोजाना काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छात्राओं और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की ओर से लंबे समय से स्कूल आने-जाने के लिए वाहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग शासन-प्रशासन से की जा रही थी।
जिलाधिकारी ने लिया समस्या का संज्ञान
मामले को लेकर सुल्ला के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह और पासम के चंद्रकांत तिवारी ने जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार से मुलाकात कर सीमांत क्षेत्र की छात्राओं की समस्या से अवगत कराया। उन्होंने विद्या वाहिनी योजना के तहत छात्र-छात्राओं के लिए विद्यालय आने-जाने की वाहन व्यवस्था किए जाने की मांग प्रमुखता से रखी।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद विद्या वाहिनी योजना के तहत छात्राओं के लिए दो स्कूल वाहनों की व्यवस्था कर दी गई।
हरी झंडी दिखाकर रवाना किए वाहन
वाहन व्यवस्था शुरू होने के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने विद्या वाहिनी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर जीआईसी रोसाल के लिए रवाना किया। इस दौरान ग्रामीण अभिभावक और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान होने पर क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल देखने को मिला। अभिभावकों ने कहा कि वाहन सुविधा मिलने से छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से स्कूल पहुंचने में मदद मिलेगी।
छात्राओं ने जताई खुशी
स्कूल आने-जाने के लिए वाहन सुविधा मिलने पर छात्राएं भी काफी खुश नजर आईं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार का आभार जताया। छात्राओं ने कहा कि अब उन्हें रोजाना लंबी दूरी पैदल तय नहीं करनी पड़ेगी।
छात्राओं के मुताबिक वाहन सुविधा मिलने से उनके समय और ऊर्जा दोनों की बचत होगी। इससे वे पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकेंगी और स्कूल पहुंचने में होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलेगी।
क्षेत्रीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भी समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का धन्यवाद किया। विद्या वाहिनी योजना के तहत शुरू हुई इस सुविधा से सीमांत क्षेत्र की छात्राओं की शिक्षा के रास्ते में आने वाली एक बड़ी बाधा दूर हुई है।