हरिद्वार में शिवालिक पर्वत माला पर माँ मनसा देवी का मंदिर स्थित है यू तो सभी मंदिरों का पौराणिक महत्व है मगर मां मनसा देवी का महात्म्य अधिक है इसी के चलते मां मनसा देवी मंदिर में भक्तों की भीड़ पूरे साल बनी रहती है और खासकर नवरात्र में बड़ी संख्या में भक्त मां की पूजा और आराधना करने के लिए पहुचते है और मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर में स्थित कचनार के पेड़ पर धागा भी बांधते है
मनसा का शाब्दिक अर्थ मनोकामना
ऐसी मान्यता है कि मनसा मां का जन्म भगवान शिव की मानस पुत्री के रूप में हुआ कुछ पुरातन ग्रंथ कहते हैं कि मनसा माता कश्यप ऋषि की पुत्री थी मनसा माता को नागों के राजा नागराज वासुकी की बहन के रूप में भी जाना जाता है मनसा का शाब्दिक अर्थ है मनोकामना अर्थात जो भी श्रद्धालु सच्चे श्रद्धा भाव से मां मनसा की पूजा अर्चना करते हैं मां उनकी सब मनोकामना पूर्ण करती है मां मनसा नागराज की बहन है इसलिए वह भक्तों की कालसर्प दोष से भी रक्षा करती हैं
मंदिर में भगवती की दो मूर्तियां स्थापित हैं एक मूर्ति की 10 भुजाएं एवं पांच मुख और दूसरी मूर्ति की अट्ठारह भुजाएं है जब महिषासुर नामक दैत्य का अत्याचार सभी लोको में देवताओं को दुखी कर रहा था तब सभी देवता ब्रह्मा विष्णु और शिव की शरण में गए और महिषासुर के अत्याचार से बचाने के लिए प्रार्थना की
तीनों देव ने जब देवताओं की करुण पुकार को सुना तो तीनों के शरीर से एक एक पुंज अवतरित हुआ ऐसे ही सभी देवताओं के शरीर से तेज पुंज निकला और वह एक जगह पर समुच्चय हुआ जिससे मां भक्ति दुर्गा का अवतार हुआ जो आसुरी शक्ति से देवत्व को बचाने के लिए मां का अवतार हुआ मां ने महिषासुर का वध करके देवताओं की मनसा को पूर्ण किया तभी से मां दुर्गा का नाम मनसा रूप में विख्यात हुआ ऐसी मान्यता है कि मनसा देवी मंदिर में आराधना करने वाले की सभी मनोकामनाए पूरी होती है नवरात्र को लेकर मंदिर में खास प्रबंध किए गए है ताकि श्रद्धालुयों को कोई परेशानी न हो।
Comments (0)