नव संवत्सर 2083 के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने ब्लॉग में लिखा,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला नवसंवत्सर भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक सोच और प्रकृति-आधारित जीवनशैली का प्रतीक है। विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ मध्यप्रदेश के लिए विशेष गौरव का विषय है, क्योंकि भारतीय कालगणना की यह समृद्ध परंपरा उज्जयिनी से ही प्रारंभ हुई मानी जाती है।
सम्राट विक्रमादित्य के राज्याभिषेक से आरंभ हुआ विक्रम संवत् भारतीय अस्मिता, सांस्कृतिक चेतना और सुशासन का प्रतीक रहा है। उनके शासनकाल में न्याय, नीति और प्रशासन के जो आदर्श स्थापित हुए, वे आज भी प्रेरणास्रोत हैं। ‘सिंहासन बत्तीसी’ जैसी कथाएं उस उत्कृष्ट शासन व्यवस्था का प्रमाण हैं, जिसमें ज्ञान, संस्कृति और नीति का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है।
इन्हीं आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है, जो 12 फरवरी से 30 जून 2026 तक चलेगा। इस 139 दिवसीय आयोजन में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनके योगदान को समाज के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
उज्जयिनी प्राचीन काल से ही भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना का केंद्र रही है। महाकाल की इस नगरी का संबंध खगोल विज्ञान, कालगणना और आध्यात्मिक साधना से रहा है। यहां की वेधशाला और वैदिक कालगणना पद्धति भारतीय ज्ञान परंपरा की श्रेष्ठता को दर्शाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन किया गया है, जो आधुनिक युग में भारतीय समय गणना को नई पहचान देता है।
सीएम डॉ. मोहन यादव का ब्लॉग,नव संवत्सर 2083 को कृषि, जल संरक्षण और समग्र विकास के नए संकल्पों से जोड़ा । प्रदेश में किसान कल्याण, जल गंगा अभियान और सांस्कृतिक विरासत के साथ विकसित मध्यप्रदेश निर्माण पर जोर ।
भारतीय नववर्ष प्रकृति के नवोदय का पर्व है। इस समय धरती पर नवचेतना और नवसृजन का संचार होता है। देशभर में इसे विभिन्न नामों से मनाया जाता है-गुड़ी पड़वा, उगादि, चैती चांद और नवरोज। इसी दिन चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ होता है, जो साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का पर्व है।
मध्यप्रदेश में नवसंवत्सर को विकास और जनकल्याण के नए संकल्पों के साथ जोड़ा गया है। इस वर्ष को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट बैठक में 27,500 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दी गई।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, सिंचाई विस्तार, प्राकृतिक खेती और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि किसान उत्पादन के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों से अतिरिक्त आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बनें।
प्रदेश में विरासत और विकास के संतुलन के साथ कार्य किया जा रहा है। ओंकारेश्वर, उज्जैन, मैहर जैसे धार्मिक स्थलों को आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही, 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ पर्व की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं। श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी योजनाएं नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बन रही हैं।
नवसंवत्सर हमें प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है। जल स्रोतों की पवित्रता और संरक्षण की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में “जल गंगा संवर्धन अभियान” शुरू किया गया है। उज्जैन के शिप्रा तट से प्रारंभ इस अभियान का उद्देश्य पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जल स्रोतों का संरक्षण करना है।
प्रदेशवासियों से अपील है कि इस अभियान को जन आंदोलन बनाएं और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें। नवचेतना और नवजागरण के इस अवसर पर हम सभी मिलकर प्रदेश के समग्र विकास और समृद्धि का संकल्प लें।
नव संवत्सर आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और नई उपलब्धियां लेकर आए-इसी मंगलकामना के साथ हार्दिक शुभकामनाएं।
Comments (0)