उत्तराखंड के प्रशासन पर एक बार फिर तानाशाही के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला खटीमा के 125 एकड़ भूमि का है जहां प्रशासन की मौजूदगी में किसानों की तैयार खड़ी फसल को जबरन जोत दिया गया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस बड़ी कार्रवाई से पहले उन्हें किसी भी प्रकार का नोटिस तक नहीं दिया गया।
विवादित जमीन पर कब्जा की कोशिश
खटीमा के दमगढ़ा झनकईया का पूरा मामला तब गरमा गया जब भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले के साथ अधिकारियों ने विवादित जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश की। मौके पर मौजूद युवराज तलवार ने प्रशासन की इस कार्यप्रणाली पर वीडियो के माध्यम से तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी कानूनी सूचना या पूर्व नोटिस के अधिकारियों ने तानाशाही दिखाते हुए किसानों की मेहनत से उगाई गई खड़ी फसल को नष्ट कर दिया। इसी बीच खटीमा पहुंचे ए डी एम पंकज उपाध्याय से मीडिया ने जबरन कार्रवाई और नोटिस न दिए जाने के आरोपों पर सवाल पूछे तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। एडीएम मामले को संज्ञान में लेने की बात तो करते रहे लेकिन ठोस कानूनी आधार या प्रक्रिया के उल्लंघन पर चुप्पी साध ली। युवराज तलवार ने कहा कि प्रशासन ने जो किया है वह सरासर गैरकानूनी है। हमारे पास कोई नोटिस नहीं आया खड़ी फसल को इस तरह बर्बाद करना किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। प्रशासन की इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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