नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय को पश्चिम मेदिनीपुर के बहुचर्चित जमीन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक को बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होकर पूछताछ में पूरा सहयोग देना होगा। मामले की अगली सुनवाई आगामी बुधवार को होगी।
कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद पहुंचे थे शीर्ष अदालत
इससे पहले, कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने जमीन घोटाले के मामले में सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में अंतरिम निर्देश जारी कर उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक पूछताछ के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया था। इस आदेश के तहत सुमित रॉय भवानी भवन में सीआईडी (CID) के समक्ष पेश हो रहे हैं और शनिवार से उनसे लगातार पूछताछ जारी है।
राजनीतिक रंजिश और देरी से FIR दर्ज करने का तर्क
सुनवाई के दौरान सुमित रॉय के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे जांच एजेंसी से रिपोर्ट लेकर सत्यापन करेंगे कि सहयोग किया जा रहा है या नहीं। सुमित रॉय के वकील का आरोप है कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत 2021 की कथित घटना के आधार पर जून 2026 में एफआईआर दर्ज की गई है।
क्या है शालबोनी जमीन घोटाले का मामला?
यह पूरा मामला पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबोनी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी जमीन पर कब्जा करने और उसे बेचने से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पैसों के बदले सरकारी जमीन बेची गई और इन दस्तावेजों को तैयार करने में सुमित रॉय की संलिप्तता थी। इस मामले में जांच के सिलसिले में सीआईडी ने कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर भी तलाशी ली थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उन्हें गिरफ्तारी से अस्थायी राहत मिल गई है, लेकिन जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी।