नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी की आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई एक हफ्ते के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है। यह निर्देश हाईकोर्ट में सुनवाई में हो रही देरी को लेकर अभिषेक बनर्जी के वकील की तरफ से जताई गई चिंता के बाद आया है।
इलाज के लिए विदेश यात्रा पर हाईकोर्ट में देरी की दलील
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनके मुवक्किल को आंखों के इलाज के लिए तत्काल विदेश जाने की आवश्यकता है। उन्होंने अदालत को बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट में मामला कंबाइंड लिस्ट में शामिल है, जिसमें डेढ़ हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिससे प्रशासनिक और चिकित्सीय समस्याएं बढ़ रही हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले को किसी भी दिन सूचीबद्ध किया जा सकता है।
जांच में सहयोग के बावजूद अनुमति न मिलने का आरोप
डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे जांच में पूरी तरह सहयोग कर चुके हैं और वॉयस सैंपल भी दे चुके हैं। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने उनसे पूछा था कि क्या कोलकाता के किसी नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लिया गया है। वकील ने स्पष्ट किया कि 2016 में एक सड़क दुर्घटना में आंख के नीचे आई गंभीर चोट के बाद से पिछले एक दशक से उनका नियमित इलाज अमेरिका में ही चल रहा है।
एसएसकेएम अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट का संदर्भ
मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि कई मामलों की जांच प्रभावित हो सकती है। इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि पहले एसएसकेएम अस्पताल (SSKM Hospital) के नेत्र विज्ञान विभाग के प्रमुख से जांच कराई जाए। यदि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम यह राय देती है कि आवश्यक इलाज कोलकाता में संभव नहीं है, तभी विदेश जाने की अनुमति पर विचार किया जाएगा। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हाईकोर्ट को एक सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा।