बाकुड़ा/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बाकुड़ा जिले के इंदास स्थित करिशुंडा गांव में शिक्षा ढांचे के विकास के लिए काम कर रहे छात्र शेख अब्दुल हाफिज के घर पर कुछ दिन पहले असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। इस दौरान अपने बेटे को बचाते हुए उसके 50 वर्षीय पिता शेख माफिक बुरी तरह घायल हो गए, जिनकी रविवार सुबह बर्दवान अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बावजूद छात्र हाफिज और उसकी मां ने सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता लेने से साफ इनकार कर दिया है और इसके बदले अपने दिवंगत पिता के नाम पर एक मुफ़्त विश्वस्तरीय स्कूल बनाने की मांग रखी है।
वित्तीय मदद ठुकराकर मुफ्त शिक्षा की मांग
सोमवार को हाफिज के घर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिवार को आर्थिक मुआवजे के लिए सरकार पर दबाव बनाने की सलाह दी थी। हालांकि, हाफिज ने इन सभी सुझावों को खारिज करते हुए मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि उन्हें कोई वित्तीय मदद नहीं चाहिए। हाफिज ने कहा कि यदि सरकार उनके नुकसान की भरपाई करना चाहती है, तो बंगाल में किसी भी स्थान पर उसके पिता के नाम पर एक विश्वस्तरीय स्कूल बनाए, जहां सभी बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
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स्कूल की बदहाली सुधारने से शुरू हुआ था विवाद
इंदास के स्थानीय प्राथमिक विद्यालय की खराब स्थिति को देखकर छात्र हाफिज ने स्कूल के प्रधानाध्यापक और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति सुधारने का प्रयास किया था। वह शिक्षा प्रणाली में सुधार के उद्देश्य से काम करने वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन से भी जुड़ा हुआ था। इसी सामाजिक पहल और गांव के स्कूल की स्थिति सुधारने के प्रयासों के कारण हाफिज के परिवार को असामाजिक तत्वों के प्रकोप का सामना करना पड़ा।
नेताओं का दौरा और परिवार की अटूट भावना
सोमवार को हाफिज के आवास पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका, सीपीआई (एम) के शतरूप घोष और एसएफआई के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव मयूर विश्वास सहित कई प्रतिनिधियों ने पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। इस दुखद घटना से आहत हाफिज की दादी जहांआरा बेगम की स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। इस व्यक्तिगत त्रासदी के बाद भी हाफिज के परिवार द्वारा शिक्षा के प्रति जताई गई यह प्रतिबद्धता अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।